घर से भागी इस एक्ट्रेस को पुलिस ने जड़े थे कई थप्पड़, प्यार में टूटीं, डिप्रेशन से लड़ीं Deepti Naval की अनकही कहानी
दीप्ति नवल की जिंदगी सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रही. घर से भागने से लेकर टूटती शादी, डिप्रेशन और सच्चे प्यार के खोने तक, उन्होंने हर दर्द को कला में बदल दिया.
भारतीय सिनेमा में दीप्ति नवल (Deepti Naval) का नाम हमेशा से एक खास जगह रखता है. 1980 के दशक में वे दर्शकों के लिए 'पड़ोस वाली लड़की' जैसी लगती थी यानी मिस चमको वाली छवि वाली, जिनकी मुस्कान इतनी प्यारी थी कि डिटर्जेंट का विज्ञापन भी चमक उठता था. लेकिन दीप्ति सिर्फ एक्ट्रेस नहीं हैं. वे एक अच्छी पेंटर, कवयित्री, फोटोग्राफर और निर्देशक भी हैं. उनके इंटरव्यू और 2022 में छपी उनकी किताब 'A Country Called Childhood' से उनकी जिंदगी की कई गहरी और संवेदनशील बातें सामने आती हैं. यह किताब उनके बचपन और अमृतसर की यादों की एक खूबसूरत तस्वीर पेश करती है, जब वह घर से भाग गई थी.
दीप्ति नवल का जन्म अमृतसर में हुआ था. अमृतसर उस समय भी विभाजन की यादों से भरा शहर था।. उनके पिता अंग्रेजी के प्रोफेसर थे और मां चित्रकार व टीचर थीं. घर में पढ़ाई-लिखाई और कला का माहौल था. मात्र दस साल की उम्र में ही दीप्ति को समझ आ गया था कि उनकी असली जगह फिल्मों की दुनिया में है. तेरह साल की छोटी उम्र में एक बार उन्होंने बहुत बड़ा साहसिक कदम उठाया. फिल्मों में दिखाए गए कश्मीर के खूबसूरत गानों और नजारों से इतना प्रभावित हुईं कि घर से भाग गईं. उनका मन कह रहा था, 'मुझे कश्मीर जाना ही है.' लेकिन वे अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाईं. रास्ते में पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और कुछ थप्पड़ भी मारे. फिर उन्हें घर वापस भेज दिया गया. दीप्ति ने बाद में बीबीसी को बताया था कि उनका दिमाग उन फिल्मी गानों से इतना भर गया था कि लगा बिना कश्मीर गए नहीं चलेगा.
अमेरिका जाना और पढ़ाई
1971 में उनके पिता को न्यूयॉर्क में नौकरी मिली, तो पूरा परिवार अमेरिका चला गया. वहां दीप्ति ने ललित कला (फाइन आर्ट्स), मनोविज्ञान और ज्योतिष जैसी चीजें पढ़ीं. ग्रेजुएट होने के बाद ही उन्होंने माता-पिता से कहा कि वे एक्टिंग करना चाहती हैं. इससे पहले वे डरती थीं कि मम्मी-पापा क्या कहेंगे?. न्यूयॉर्क में उन्होंने जीन फ्रैंकल इंस्टीट्यूट से टेलीविजन और कैमरा वर्क की ट्रेनिंग ली. एक छात्रा के रूप में उन्होंने रेडियो शो भी होस्ट किया और राज कपूर, दिलीप कुमार जैसे बड़े सितारों के इंटरव्यू भी लिए बस एक माइक और टेप रिकॉर्डर लेकर.
मुंबई में संघर्ष और सफलता
जब भारत लौटने का मौका मिला, तो दीप्ति ने बिना परिवार को बताए मुंबई में कदम रख दिया. उन्होंने कहा, 'मैंने बस संघर्ष शुरू कर दिया.' पहले राजश्री फिल्म्स गईं, वहां हेमंत दा से मिलीं, फिर बसु चटर्जी और ऋषिकेश मुखर्जी से. ये सब उनके बचपन के हीरो थे. फिर साई परांजपे से मुलाकात हुई और फिल्म 'चश्मे बद्दूर' मिल गई. इस फिल्म से वे रातों-रात स्टार बन गईं. उसके बाद 'साथ साथ', 'कथा', 'अंगूर' जैसी फिल्में आईं, जिन्हें बहुत पसंद किया गया. दीप्ति मीडिल क्लॉस परिवार की सच्ची और रीयलिस्टिक गर्ल की छवि बन गईं. वे कहती हैं, 'शुरुआत तो बहुत आसान थी, लेकिन असली मुश्किल बाद में शुरू हुई जब सफलता को बनाए रखना पड़ता है.
प्रकाश झा से शादी और मुश्किल दौर
80 के दशक के अंत में दीप्ति को हल्के-फुल्के रोल से थकान होने लगी. वे गहरी और अर्थपूर्ण फिल्में करना चाहती थीं इसलिए छह महीने तक कोई फिल्म साइन नहीं की. इंडस्ट्री ने इसे गंभीरता की कमी समझा. फिर 'कमला' फिल्म आई, जहां उनकी मुलाकात प्रकाश झा से हुई. यह फिल्म वैसी थी जैसी वे चाहती थीं. इसके बाद 'अनकही' जैसी फिल्में आईं. लेकिन 1985 में प्रकाश झा से शादी हो गई. उस समय बॉलीवुड में शादीशुदा हीरोइनों को काम नहीं मिलता था. लोग मानते थे कि शादी के बाद एक्ट्रेस की रुचि खत्म हो जाती है. दीप्ति के लिए यह बहुत मुश्किल समय था. काम कम हो गया, और शादी भी जल्दी ही टूटने लगी.
महसूस हुआ गहरा डिप्रेशन
शादी के कुछ साल बाद ही रिश्ता बिगड़ गय. दोनों के बीच बातचीत बंद हो गई. दीप्ति गहरे डिप्रेशन में चली गईं. वे साइकोलॉजी पढ़ चुकी थीं, इसलिए लक्षण पहचान लेती थीं. लेकिन सेलिब्रिटी होने के कारण मदद मांगना मुश्किल था. वे डरती थीं कि लोग क्या सोचेंगे वे कहती हैं, 'हर 20-25 दिन में लगता था कि सब कुछ खत्म हो गया. करियर गलत चुन लिया लेकिन उन्होंने खुद को संभाला. गैराज में जाकर पेंटिंग की, डायरी में लिखा. असफलता से ही कलाकार मजबूत बनता है. प्रकाश झा से तलाक 2002 में हुआ. आज वे एक-दूसरे के अच्छे दोस्त हैं. दोनों ने 1988 में दिशा झा नाम की बेटी गोद ली थी.
विनोद पंडित के साथ प्यार और दुख
प्रकाश झा से अलग होने के बाद दीप्ति की मुलाकात एक्टर और शास्त्रीय सिंगर पंडित जसराज के भतीजे विनोद पंडित से हुई. दोनों ने टीवी सीरियल 'थोड़ा सा आसमान' में साथ काम किया. विनोद ने दीप्ति की क्रिएटिविटी को फिर से जगाया. वे साथ पहाड़ों में घूमते, कला करते. दीप्ति ने पहली पेंटिंग एक्सहिबिशन भी विनोद की वजह से लगाई. फोटोग्राफी और राइटिंग भी शुरू किया. लेकिन विनोद को कैंसर हो गया और वे चल बसे. यह दीप्ति के लिए बहुत बड़ा सदमा था. अस्पताल के बिल भरने के लिए उन्हें फिर से काम करना पड़ा. वे कहती हैं, 'विनोद ने मेरे अंदर सबसे अच्छी चीजें निकालीं. हम दोनों की पिछली शादियां असफल रही थीं, इसलिए शादी से डरते थे. हम बस प्यार में जीना चाहते थे.
आज की दीप्ति नवल
दीप्ति आज भी अभिनय करती हैं, पेंटिंग बनाती हैं, फोटोग्राफी करती हैं और लिखती हैं. वे विनोद पंडित चैरिटेबल ट्रस्ट चलाती हैं, जो लड़कियों की शिक्षा के लिए काम करता है. उनकी जिंदगी संघर्षों, प्यार, दुख और क्रिएटिविटी से भरी है. वे सच में एक अनोखी और मजबूत महिला हैं, जिन्होंने हर मुश्किल से खुद को निकाला और कला के जरिए खुद को संभाला.