कॉमेडी के साथ-साथ अपनी गंभीर संजीदा एक्टिंग से सबका दिल जीतने वाले राजकुमार राव (Rajkummar Rao) एक बार सिल्वरस्क्रीन पर अपने दामदार अंदाज में वापस आ रहे है. उनकी अपकमिंग फिल्म 'प्रहार' (Prahaar) का फर्स्ट लुक जारी किया गया. जो एक ऐसी सच्ची घटना की दास्तां सुनाएगी जिसे सालों-साल देश कभी भूल नहीं सकता. राजकुमार ने राव ने 'प्रहार' के फर्स्ट लुक के साथ फिल्म कुछ पोस्टर शेयर किए है. जिसके कैप्शन में लिखा है, 'त्रासदी तो आप जानते हैं, लेकिन मुक़दमे के बारे में नहीं जानते. 'प्रहार' में जानिए यह कहानी - उज्ज्वल निकम के रोल में राजकुमार राव.' वहीं फर्स्ट लुक में जो कैप्शन दिया है उसके जरिए पूरे देश को यह फिल्म जवाब देगी कि आखिर कसाब को फांसी देने में समय क्यों लगा?. राजकुमार ने कैप्शन में लिखा, 'कसाब को फाँसी देने में इतना समय क्यों लगा? उज्जवल निकम के रूप में राजकुमार राव प्रहार में सच्चाई उजागर करते हैं.' 

क्या था 26\11?

मुंबई का वो खौफनाक मंजर आज भी हर हिंदुस्तानी के दिल को दहला देता है. जब 26 नवंबर 2008 को समंदर के रास्ते आए 10 आतंकियों ने मायानगरी को खून से नहला दिया था. सुरक्षाबलों ने मुस्तैदी दिखाते हुए 9 हमलावरों को ढेर कर दिया, जबकि एक आतंकी जिंदा पकड़ा गया अजमल आमिर कसाब. कसाब की वो तस्वीर आज भी लोगों के जेहन में ताजा है, जिसमें वह हाथ में बंदूक थामे छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) पर बेगुनाहों को निशाना बना रहा था. लेकिन इस पूरी त्रासदी के बाद देश के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा हुआ. जब कसाब का गुनाह पूरी दुनिया के सामने बेनकाब हो चुका था, कैमरे में उसकी लाइव तस्वीरें कैद थीं, तो फिर उसे फांसी के फंदे तक लटकाने में 4 साल का लंबा वक्त क्यों लग गया? आम जनता के मन में यह गुस्सा और उलझन सालों तक बनी रही. अब इसी अनसुने और पेचीदा सच से पर्दा उठाने आ रही है 'प्रहार'. यह फिल्म सिर्फ एक आतंकी की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस अदालती और कूटनीतिक लड़ाई का लेखा-जोखा है जो बंद दरवाजों के पीछे लड़ी गई थी.

कौन है उज्जवल निकम

उज्ज्वल निकम भारत के सबसे मशहूर, सीनियर और हाई-प्रोफाइल पब्लिक प्रोसिक्यूटर (सरकारी वकील) हैं. उन्होंने देश के कई ऐसे बड़े और संवेदनशील आपराधिक मामलों में सरकार का पक्ष रखा है, जिन्होंने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था।. कानून के क्षेत्र में उनके शानदार करियर और सख्त रुख की वजह से उन्हें भारतीय कानूनी इतिहास में एक बेहद खास मुकाम हासिल है. उज्ज्वल निकम की सबसे बड़ी पहचान 26/11 के मुंबई आतंकी हमले के मामले से जुड़ी है. इस ऐतिहासिक केस में वह मुख्य सरकारी वकील थे. उन्होंने ही आतंकी अजमल आमिर कसाब के खिलाफ अदालत में सबूत पेश किए और कानूनी दांव-पेचों को बखूबी संभालते हुए कसाब को फांसी के फंदे तक पहुंचाने में सबसे अहम भूमिका निभाई. उन्हें अन्य हाई-प्रोफाइल मामले के लिए भी जाना जाता है. जिसमें 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट, गुलशन कुमार हत्याकांड, प्रमोद महाजन हत्याकांड और कोपर्डी और शक्ति मिल रेप केस जैसे हाई प्रोफाइल केस के लिए जाना जाता है.

चार्जशीट से लेकर फांसी तक कसाब केस का पूरा टाइमलाइन 

कसाब को पकड़ने से लेकर उसकी आखरी सांस तक, हर कदम पर फूंक-फूंक कर कदम रखा गया, जो काफी लंबा था.

फरवरी 2009: मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कसाब और अन्य आरोपियों के खिलाफ 11,000 से ज्यादा पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। इसमें सैकड़ों गवाहों के बयान और अकाट्य सबूत शामिल थे 

मई 2010: विशेष अदालत ने कसाब को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई। लेकिन भारतीय कानून के तहत इस सजा पर बॉम्बे हाई कोर्ट की मुहर लगना जरूरी था 

फरवरी 2011: बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी कसाब की फांसी की सजा को बरकरार रखा. इसके बाद मामला देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. 

अगस्त 2012: सुप्रीम कोर्ट ने कसाब की अपील को खारिज करते हुए उसकी मौत की सजा पर अंतिम मुहर लगा दी. 

नवंबर 2012: कसाब ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजी, जिसे तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने खारिज कर दिया. इसके बाद 21 नवंबर 2012 को पुणे की यरवदा जेल में उसे बेहद गोपनीय तरीके से फांसी दे दी गई. 

फिल्म की स्टारकास्ट 

7 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही इस फिल्म में राजकुमार राव के अलावा फिल्म में वामिका गब्बी, सिकंदर खेर और जयदीप अहलावत भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नज़र आएंगे. इस फिल्म का निर्देशन अविनाश अरुण ने किया है. फिल्म का निर्माण दिनेश विजान (मैडॉक फिल्म्स) द्वारा किया जा रहा है。 राजकुमार राव और दिनेश विजान इससे पहले 'स्त्री 2' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में भी साथ काम कर चुके हैं. इसके पहले राजकुमार को ओटीटी फिल्म 'टोस्टर' में देखा गया था.