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तिरुपरनकुंड्रम दीप प्रज्वलन मामले पर मद्रास हाईकोर्ट (मदुरै बेंच) की टिप्पणी

मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ के जस्टिस जयचंद्रन ने तिरुपरनकुंड्रम में दीप प्रज्वलन को लेकर चल रहे विवाद पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. अदालत ने कहा कि दीप प्रज्वलन के लिए पहले जो स्थान तय किया गया था, उसके बजाय किसी अन्य स्थान की पहचान की गई है और इसमें स्पष्ट अंतर है.

जस्टिस जयचंद्रन ने कहा कि एकल न्यायाधीश के आदेश के अनुसार, दीप प्रज्वलन को सामान्य स्थान के अलावा कहीं और स्थानांतरित करना प्रशासनिक अधिकारियों के विवेक पर छोड़ दिया गया है. इसके बाद एक विशेष स्थान को लेकर एक अभ्यावेदन दिया गया, जिसे और विस्तार से रखा गया, और उसी के आधार पर न्यायाधीश ने आदेश पारित किया.

हालांकि, अब देवस्थानम (मंदिर प्रशासन) का कहना है कि प्रस्तावित स्थान उपयुक्त नहीं है. वहीं राज्य सरकार ने आशंका जताई है कि इससे कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. मामले में यह भी कहा जा रहा है कि विवादित स्थान को लेकर मतभेद हैं. कुछ का कहना है कि वह सर्वे स्टोन है, जबकि अन्य पक्ष उसे मस्जिद से संबंधित भूमि बता रहे हैं.

इसके अलावा, अदालत के समक्ष तीन न्यायाधीशों की पीठ के एक आदेश का भी हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया है कि इस प्रकार के मामलों में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से अनुमति लेना आवश्यक है. इस टिप्पणी के साथ अदालत ने संकेत दिया कि दीप प्रज्वलन के स्थान को लेकर अंतिम निर्णय सभी संबंधित पहलुओं -उपयुक्तता, कानून-व्यवस्था और वैधानिक अनुमति को ध्यान में रखते हुए लिया जाना चाहिए.

Update: 2025-12-16 11:47 GMT

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