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लोकसभा में राहुल गांधी का बयान: “भारत एक कपड़े की तरह है, जिसकी बुनियाद वोट है”

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मंगलवार को खादी, भारतीय संस्कृति और लोकतंत्र पर एक विस्तृत और भावनात्मक भाषण दिया. उन्होंने महात्मा गांधी के खादी के विचार को समझाते हुए कहा कि भारत का हर ताना-बाना करोड़ों लोगों की एकता, विविधता और लोकतांत्रिक शक्ति का प्रतीक है. राहुल गांधी ने कहा कि भारत सिर्फ लोगों का समूह नहीं, बल्कि एक खूबसूरत कपड़ा है—जो तभी मजबूत बनता है जब उसकी हर डोरी एक साथ बुनी जाती है.

“खादी सिर्फ कपड़ा नहीं, जनता की अभिव्यक्ति है”

राहुल गांधी ने कहा कि “क्या आपने कभी सोचा कि महात्मा गांधी ने खादी पर इतना जोर क्यों दिया? उन्होंने पूरी आज़ादी की लड़ाई को खादी के इर्द-गिर्द क्यों बनाया और खुद सिर्फ खादी ही क्यों पहनी? क्योंकि खादी सिर्फ एक कपड़ा नहीं है. खादी भारत की जनता की अभिव्यक्ति है; यह उनकी कल्पना है, उनकी भावना है, उनकी उत्पादक शक्ति है.” उन्होंने कहा कि भारत के हर राज्य में अलग-अलग तरह के पारंपरिक वस्त्र मिलते हैं—हिमाचली कैप, असमी गमूचा, बनारसी साड़ी, कांचीपुरम सिल्क, नागा जैकेट—जो अपनी-अपनी संस्कृति और पहचान को दर्शाते हैं.

“कपड़े की हर डोरी महत्वपूर्ण है, कोई दूसरी से श्रेष्ठ नहीं”

इस सांस्कृतिक विविधता को समझाते हुए राहुल बोले कि “अगर आप थोड़ा गहराई से देखें तो पाएंगे कि हर कपड़े में हजारों छोटी-छोटी डोरियां एक-दूसरे से लिपटी होती हैं… कोई भी डोरी दूसरी से बड़ी नहीं होती. अकेली डोरी न आपको गर्म रख सकती है, न सुरक्षा दे सकती है. लेकिन जब वही डोरियां मिलकर एक कपड़ा बनती हैं, तभी वह आपको बचाती हैं, गर्म रखती हैं और आपके दिल की बात को व्यक्त करती हैं.”

“भारत भी 1.4 बिलियन डोरियों से बुना हुआ एक कपड़ा है”

राहुल गांधी ने भारत को एक कपड़े की तरह बताते हुए कहा कि “ठीक उसी तरह हमारा देश भी 1.4 बिलियन लोगों से बुना हुआ एक विशाल ताना-बाना है—और इस कपड़े को जो चीज़ बुनती है, वह है ‘वोट’.’’ “वोट के बिना कोई संसद, कोई पंचायत अस्तित्व में नहीं”, भाषण के अंत में, उन्होंने लोकतंत्र की अहम भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि “यह लोकसभा, राज्यसभा, देशभर की विधानसभाएं, पंचायतें—इनमें से कोई भी वोट के बिना अस्तित्व में नहीं होती…” राहुल गांधी का यह बयान खादी, भारतीय परंपरा और लोकतंत्र को जोड़ते हुए एक सशक्त राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है.

Update: 2025-12-09 11:21 GMT

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