Gold Silver Price: बजट से पहले सोना-चांदी की कीमतों में सबसे बड़ा क्रैश, जानिए 3 बड़े कारण
1 फरवरी 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। MCX पर गोल्ड और सिल्वर करीब 6% तक टूट गए हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह मुनाफावसूली, CME ग्रुप द्वारा मार्जिन में बढ़ोतरी और अमेरिकी डॉलर की मजबूती मानी जा रही है. इसके अलावा बजट 2026 में सोने-चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी घटने की उम्मीद ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है. रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद अब बाजार में करेक्शन देखने को मिल रहा है.;
Gold Silver Price Crash: आज सुबह, यानी 1 फरवरी 2026 को रविवार के दिन, सोने और चांदी की कीमतों में बहुत बड़ी गिरावट देखने को मिली है. एमसीएक्स (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर सोने की कीमत में लगभग 6% की भारी कमी आई है, और यह अपने निचले स्तर तक पहुंच गई. इसी तरह चांदी की कीमत में भी करीब 6% की गिरावट दर्ज की गई।यह गिरावट इसलिए आई क्योंकि पिछले कई महीनों से, खासकर पिछले एक साल में, सोने और चांदी की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ी थी. निवेशक और व्यापारी अब मुनाफा वसूल (प्रॉफिट बुकिंग) कर रहे हैं, यानी वे अपने पुराने सौदों को बंद करके कमाई निकाल रहे हैं.
इससे बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया. एमसीएक्स पर अप्रैल वायदा सोने (गोल्ड) की कीमत में ₹40,757 या करीब 22.2% की बड़ी गिरावट आई, और यह ₹1,43,205 प्रति 10 ग्राम के अंतर्देशीय (inland) निचले स्तर पर पहुंच गई. वहीं मार्च में सिल्वर की कीमत में ₹1,25,483 या 31.4% की जबरदस्त कमी आई, और यह ₹2,74,410 प्रति किलोग्राम पर आ गई. ग्लोबल लेवल पर भी सोने और चांदी की कीमतों में भारी मुनाफावसूली चल रही है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत में 1983 के बाद से सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट दर्ज की जा रही है. चांदी की कीमत में तो अब तक की सबसे बड़ी दैनिक गिरावट का अनुमान लगाया जा रहा है.
इस तेज गिरावट के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं:
1- सीएमई (CME) ग्रुप द्वारा मार्जिन में बढ़ोतरी
.CME ग्रुप, जो कॉमेक्स (Comex) पर सोने-चांदी के फ्यूचर्स ट्रेडिंग को कंट्रोल करता है, ने बाजार में बढ़ती अस्थिरता को काबू करने के लिए मार्जिन आवश्यकताओं को बढ़ा दिया है. सोने के फ्यूचर्स के लिए: कम जोखिम वाली पोजीशन पर मार्जिन 6% से बढ़ाकर 8% कर दिया गया. उच्च जोखिम वाली पोजीशन पर 6.6% से बढ़ाकर 8.8%.
.चांदी के लिए: कम जोखिम वाली पर 11% से 15%, और उच्च जोखिम वाली पर 12.1% से 16.5% तक बढ़ा दिया गया. मार्जिन बढ़ने से ट्रेडिंग महंगी हो जाती है. व्यापारियों को एक ही मात्रा में सौदा बनाए रखने के लिए पहले से ज्यादा पैसे जमा करने पड़ते हैं. इससे छोटे-मोटे सट्टेबाज (स्पेकुलेटर्स) बाजार से बाहर हो जाते हैं या नई पोजीशन लेने से हिचकिचाते हैं, जिससे कीमतों पर और दबाव पड़ता है.
2- अमेरिकी डॉलर की मजबूती
डॉलर मजबूत होने से सोना-चांदी जैसे कमोडिटी महंगे हो जाते हैं (क्योंकि ये डॉलर में ट्रेड होते हैं). मजबूत डॉलर से निवेशक इनकी तरफ कम आकर्षित होते हैं, जिससे बिकवाली बढ़ती है.
3- बजट 2026 में सीमा शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) में कटौती की उम्मीद
भारत में आने वाले यूनियन बजट 2026 में सोने-चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी कम होने की संभावना से भी कीमतों पर असर पड़ रहा है. अगर ड्यूटी घटती है, तो आयात सस्ता हो जाएगा, जिससे घरेलू कीमतें नीचे आ सकती हैं. इससे पहले से ही निवेशक सतर्क हो गए हैं और बिकवाली कर रहे हैं.
पिछले दिनों की रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद अब बाजार में सुधार (करेक्शन) चल रहा है. यह गिरावट निवेशकों के लिए चौंकाने वाली है, लेकिन बाजार में ऐसे उतार-चढ़ाव आम हैं, खासकर जब कीमतें बहुत तेजी से बढ़ती हैं. आज MCX खुला हुआ है क्योंकि बजट पेश होने के कारण स्पेशल सेशन है, और सबकी नजरें बजट पर टिकी हैं कि आगे क्या होता है.