बजट 2026 में बड़ा फिस्कल ट्विस्ट: घाटे से हटकर अब कर्ज बनेगा सरकार का असली पैमाना, इस साल तक का टारगेट सेट

बजट 2026 में सरकार ने फिस्कल पॉलिसी को लेकर बड़ा बदलाव संकेत दिया है. अब केवल फिस्कल डेफिसिट नहीं, बल्कि कर्ज-से-जीडीपी अनुपात (Debt-to-GDP Ratio) को आर्थिक अनुशासन का मुख्य पैमाना बनाने की तैयारी है. इसका मकसद आर्थिक झटकों के समय सरकार को ज्यादा लचीलापन देना और लंबी अवधि में वित्तीय स्थिरता बनाए रखना है. सरकार FY27 तक कर्ज को जीडीपी के 55% के आसपास लाने का लक्ष्य तय कर सकती है, जिससे विकासोन्मुख खर्च के लिए नीति निर्धारकों को ज्यादा स्पेस मिलेगा.;

( Image Source:  ANI )
By :  सागर द्विवेदी
Updated On : 1 Feb 2026 8:02 AM IST

केंद्र सरकार की राजकोषीय नीति (Fiscal Policy) एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है.  इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्टे के मुताबिक, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को पेश होने वाले अपने नौवें लगातार बजट में फिस्कल कंसॉलिडेशन का फोकस Fiscal Deficit से हटाकर Debt-to-GDP Ratio पर शिफ्ट करने जा रही हैं. यह बदलाव भारत की बजटीय रणनीति में एक अहम मोड़ माना जा रहा है.

हालांकि सरकार पहले ही इस नए फिस्कल गाइडेंस मॉडल की मंशा जता चुकी थी, लेकिन वित्त वर्ष 2026-27 के लिए यह पहला बजट होगा जिसमें Debt-to-GDP को पूरे वित्तीय वर्ष के लिए औपचारिक रूप से नीति का आधार बनाया जाएगा.

सरकार को मिलेगा ज्यादा खर्च करने का स्पेस

नीति निर्माताओं का मानना है कि Debt-to-GDP को फिस्कल एंकर बनाने से सरकार को विकासात्मक खर्च (Development Spending) बढ़ाने की ज्यादा गुंजाइश मिलेगी. साथ ही, राजकोषीय संतुलन की रफ्तार को भी धीरे-धीरे और व्यावहारिक तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा. यह मॉडल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनाया जाता रहा है.

2031 तक Debt-to-GDP 50% पर लाने का लक्ष्य

केंद्र सरकार ने अनुमान जताया है कि मार्च 2031 तक Debt-to-GDP Ratio को घटाकर 50±1% पर लाया जाएगा, जो कि मार्च 2026 में अनुमानित 56.1% था. ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि सरकार FY27 के बजट में इसे करीब 55% पर तय कर सकती है.

वैश्विक मानकों के अनुरूप भारत की नई रणनीति

UBS Securities India ने एक नोट में कहा कि 'वैश्विक स्तर पर, फिस्कल नीति को Debt-to-GDP अनुपात से जोड़ने से सरकारों को आर्थिक झटकों से निपटने में अधिक लचीलापन मिलता है, साथ ही दीर्घकालिक स्थिरता भी बनी रहती है। भारत में हमारा मानना है कि इससे आर्थिक बफर्स दोबारा मजबूत करने में मदद मिलेगी और नीति-निर्माताओं को जरूरत पड़ने पर विकास को बढ़ावा देने वाले खर्च के लिए पर्याप्त गुंजाइश मिलेगी.'

नॉमिनल GDP और उधारी पर निर्भर करेगा नया ढांचा

Debt-to-GDP Ratio सीधे तौर पर Nominal GDP Growth, सरकारी उधारी और कर्ज चुकाने की जिम्मेदारियों पर निर्भर करेगा. आने वाले वर्षों में 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद सरकार पर वित्तीय बोझ और बढ़ सकता है. ICICI Bank Economic Research के मुताबिक, अगर 2031 तक हर साल Debt-to-GDP Ratio में 1% की कटौती होती है, तो FY27 में Fiscal Deficit करीब 4.2% रहेगा. बैंक ने कहा कि इस स्तर का घाटा भी आने वाले वर्षों में भारी कर्ज चुकौती के चलते उच्च उधारी को दर्शाता है.

कोविड के बाद फिर मजबूत हुई फिस्कल कंसॉलिडेशन

Economic Survey 2025-26, जो शुक्रवार को संसद में पेश हुआ, के मुताबिक भारत ने 2020 के बाद से General Government Debt-to-GDP Ratio में 7.1 प्रतिशत अंकों की कमी की है, वह भी ऊंचे सार्वजनिक निवेश को बनाए रखते हुए. सर्वे में कहा गया है कि केंद्र सरकार का 50±1% Debt-to-GDP का मध्यम अवधि लक्ष्य, आगे भी राजकोषीय अनुशासन का मजबूत आधार बनेगा.

राज्यों की भूमिका पर बढ़ेगी नजर

General Government Debt में केंद्र के साथ-साथ राज्यों का कर्ज भी शामिल होता है, जिसे ग्लोबल रेटिंग एजेंसियां देश की वित्तीय सेहत आंकने के लिए देखती हैं. ऐसे में राज्यों की वित्तीय स्थिति भी ज्यादा जांच के दायरे में रहेगी. मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन ने कहा कि 'हमें कुछ परिदृश्य विश्लेषण करना होगा… और उसके बाद किसी ठोस व संतुलित निर्णय पर पहुँचना होगा.' उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्यों के लिए अलग Debt Target तय करने से पहले 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों का इंतजार जरूरी है.

राज्यों को भी Debt-to-GSDP रोडमैप की जरूरत

SBI के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर सौम्य कांति घोष ने कहा कि राज्यों को सिर्फ सालाना घाटे के लक्ष्य पर नहीं, बल्कि मध्यम अवधि के Debt-to-GSDP Trajectory पर काम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि 'पहले दौर में कुल कर्ज में केंद्र का योगदान सबसे अधिक था, जबकि दूसरे दौर में राज्यों का योगदान प्रमुख रूप से बढ़ा…”और बताया कि 2015 में UDAY स्कीम के तहत बिजली क्षेत्र के कर्ज राज्यों पर आने से राज्यीय कर्ज बढ़ा. RBI पहले ही राज्यों से अपने कर्ज को नियंत्रित करने की अपील कर चुका है. RBI की रिपोर्ट के अनुसार, राज्यों का कुल कर्ज मार्च 2024 में GDP के 28.1% तक आ गया था, लेकिन इसके FY26 के अंत तक 29.2% तक बढ़ने का अनुमान है.

केंद्र 4.5% से नीचे रखेगा घाटा

केंद्र सरकार FY26 तक Fiscal Deficit को GDP के 4.5% से नीचे रखने की प्रतिबद्धता पर कायम है. हालांकि हालिया इनकम टैक्स और GST कटौती भविष्य में घाटे पर दबाव डाल सकती है. BofA Securities के अर्थशास्त्रियों ने कहा कि 'हमारा मानना है कि सरकार वित्त वर्ष 2026-27 में कर्ज के लक्ष्य के रूप में GDP के लगभग 55 प्रतिशत को निर्धारित करने की दिशा में आगे बढ़ेगी…' और FY27 में 4.3-4.4% Fiscal Deficit का अनुमान जताया.

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