बाढ़ में फंसने से कैसे बची राजधानी काठमांडू, पूर्व PM प्रचंड दहल ने ‘स्टेट मिरर हिंदी’ को क्या-क्या बताया?
नेपाल में आई प्रलय के बाद भारी तबाही मची है. लगातार बाढ़ प्रभाविक इलाकों से शव निकाले जा रहे हैं. वहीं इस आपदा को लेकर नेपाल के पूर्व पीएम पुष्प कमल दहल ने स्टेट मिरर हिंदी से बातचीत की.
nepal flash floods former pm Pushpa Kamal Dahal
बुधवार को नेपाल में बाढ़ से आई तबाही से दुनिया भर में कोहराम मचा है. इस बाढ़ की जिम्मेदारी का ठीकरा तमाम खबरों में भारत, नेपाल, पाकिस्तान के पड़ोसी देश चीन के सिर पर भी फोड़ा जा रहा है. हालांकि, चीन ने इस खबरों का साफ तौर पर खंडन कर दिया है कि, नेपाल में आई बाढ़ और उससे हुई तबाही के लिए हम (चीन) किसी भी तरह से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार नहीं हैं. ऐसी तबाही वाली बाढ़ क्यों कैसे आई और आइंदा इस तरह की आपदाओं से कैसे देश को वक्त रहते सुरक्षित रखा जा सकता है?
इन्हीं तमाम सवालों के जवाब पाने की उम्मीद में नेपाली हुक्मरानों ने ‘सर्वदलीय-बैठक’ भी गुरुवार को बुलाई. आपदा के ऐसे डरावने दौर में देश की मौजूदा हुकूमत द्वारा सर्वदलीय आपातकालीन बैठक बुलाए जाने की पुष्टि नेपाल में मौजूद वहां के पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ने भी नई दिल्ली में मौजूद स्टेट मिरर हिंदी के एडिटर इनवेस्टीगेशन संजीव चौहान से ‘व्हाट्सएप-कॉल’ पर गुरुवार को बात की.
क्या बोले नेपाल के पूर्व पीएम पुष्प कमल दहल?
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री ने संक्षिप्त बातचीत में कहा, “नुकसान का अंदाजा लगा पाना फिलहाल संभव नही है. यह प्रलयंकारी बाढ़ आई कैसे और देश को पूर्वानुमान कैसे नहीं हो सका, आइंदा इस तरह की दैवीय आपदाएं आने से पहले ही सुरक्षा इंतजाम कर लिए जाएं, और इस तरह की प्रलंयकारी घटनाओं का सटीक पूर्वानुमान लगाए जाने के और क्या-क्या इंतजाम होने चाहिए, इस पर गुरुवार को विशेष सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी. जिसमें मैं खुद भी मौजूद था. बाढ़ से हुई बर्बादी और नुकसान का पता जल्दी ही लगाए जाने की कोशिशें तेज हो चुकी हैं. फिलहाल जो लोग और इलाके बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित रहे हैं, उनमें हरसंभव मदद पहुंचाए जाने की कोशिशें दिन रात जारी हैं.”
देश में आई इस आपदा की चपेट में आने से नेपाल की राजधानी काठमांडू बाल-बाल बच गई. नेपाल में जिस जगह पर अचानक कई नदियों में आए जलजला या भयंकर प्रलंयकारी बाढ़ ने कोहराम मचा डाला है. अब तक 150 से ज्यादा लोग इस बाढ़ की बलि चढ़ चुके हैं. सैकड़ों विदेशी सैलानी-पर्यटकों सहित हजारों लोग बाढ़ की चपेट में आने से गायब बताए जा रहे हैं. ऐसी तबाही वाली बाढ़ से नेपाल की राजधानी आन-बान-शान काठमांडू महज 40-50 किलोमीटर दूर बताई जा रही है.
खेमचंद आचार्य ने क्या दी जानकारी?
काठमांडू में मौजूद नेपाल जनता पार्टी प्रमुख और राष्ट्रीय अध्यक्ष खेमचंद आचार्य ने नई दिल्ली में मौजूद स्टेट मिरर हिंदी से फोनलाइन पर विशेष बातचीत में कहा, “बाढ़ में तबाही हुई यह तो सबको दिखाई दे रहा है. तबाही किस स्तर की हुई है, कितने लोगों की जान इस बाढ़ ने ले ली है. इन सवालों के जवाब लेना अभी बाकी है. फिलहाल भारत सहित नेपाल इस आपदा से प्रभावित इलाकों में लोगों की मदद करने के लिए युद्धस्तर पर जुटे हैं.”
खेमचंद्र आचार्या ने आगे कहा, “नेपाली अखबारों-मीडिया में जो खबरें आ रही हैं उनके मुताबिक 150 से 200 के बीच लोग इस बाढ़ की त्रासदी में अपनी जान गंवा चुके हैं. बड़ी संख्या में अगर स्थानीय नेपाली नागरिक बहे हैं तो कई विदेशी पर्यटक भी बाढ़ की चपेट में आने के बाद से गायब हैं. नेपाल पुलिस के कई जवानों का भी इस बाढ़ के बाद से पता नहीं चल रहा है. सभी के लिए तलाशी अभियान जारी है. प्रलयंकारी बाढ़ ने कई गावों-मोहल्लों में मौजूद मकानात को भी कागज की तरह अपने में समेट कर गायब कर दिया है. कुछ गांव-मोहल्ले में जो मकान बचे भी हैं वे खाली पड़े हैं. क्योंकि लोग अपनी जान बचाने को घरों को छोड़कर भागने में कामयाब रहे.”
कितने लोगों की हुई मौत?
तिब्बत सीमा से सटे उत्तरी नेपाल में बुधवार (26 अगस्त 2026) को अचानक कहर बरपाती आई जल-प्रलय (फ्लैश-फ्लड) ने अगर नेपाल को हिलाकर रख दिया है तो दुनिया भी इस प्रलंयकारी दैवीय घटना से हैरत में. नेपाली मीडिया के मुताबिक बाढ़ की चपेट में आने से अब तक 175 लोगों को मौत हो चुकी है. जबकि हजारों के बाढ़ के जानलेवा तेज बहाव में बह जाने की खबर है. गायब होने वालों में फिलहाल 250-300 के बीच भारतीय नागरिकों की संख्या भी बताई जा रही है. जोकि कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर थे. घटनाक्रम के मुताबिक तबाही की शुरूआत बुधवार को भोटेकोशी औ त्रिशूली नदियों में अचानक से पानी का नियमित बहाव प्रलंयकारी रुप में बदल गया. इसकी वजह तिब्बत क्षेत्र में आया भूकंप और उसके साथ ही हुआ हिमस्खलन माना जा रहा है. इस विनाशकारी बाढ़ ने सबसे ज्यादा तबाही-कोहराम रसुवा, धाडिंग, नुवाकोट, चितवन और गोरखा जिलों के तटीय इलाकों में मचाया है.
बाढ़ की भीषणता या तीव्र डरावनी तूफानी रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि, नेपाल चीन हद पर मौजूद रसुवागढ़ी सीमा का 5 मंजिला इमिग्रेशन कार्यालय और आसपास मौजूद कई मजबूत पुल ताश के पत्ते या कहिए कागज की मानिंद बाढ़ के प्रलयंकारी बाहव में बहते दिखे. इस तबाही के चलते काठमांडू को जोड़ने वाला मुख्य नागढुंगा-मुग्लिन राष्ट्रीय राजमार्ग भी बंद हो चुका है. भूस्खलन से राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई जगह मलबा के बड़े-बड़े ढेर लगे दिखाई दे रहे हैं. 11 हाइड्रो पावर प्लांट्स बाढ़ ने पूरी तरह से निगल लिए हैं. इनसे 431 मेगावाट की बिजली आपूर्ति ठप पड़ी है.




