March 12, 2026
हम अक्सर सुनते हैं कि “3 तिगाड़ा काम बिगाड़ा”, इसलिए कई लोग 3 नंबर को अशुभ मान लेते हैं. लेकिन ऐसा नहीं है. चलिए जानते हैं कैसे.
अथर्ववेद में एक श्लोक के अनुसार 3 और 7 को ब्रह्मांड की मूल संख्याओं में गिना गया है. इन संख्याओं को सृष्टि के संतुलन और ऊर्जा का आधार माना जाता है.
अनुसार परमात्मा जब अपने स्वरूप को प्रकट करते हैं, तो वह तीन गुणों में दिखाई देते हैं. इन्हें सत्व, रज और तम कहा जाता है, जो प्रकृति के मूल गुण माने जाते हैं.
हिंदू धर्म में सृष्टि का संचालन त्रिदेव करते हैं यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश. ब्रह्मा सृष्टि के रचयिता हैं, विष्णु पालन करते हैं और शिव संहार करते हैं. इसलिए 3 संख्या सृष्टि के संतुलन का प्रतीक है.
आयुर्वेद के अनुसार मानव शरीर तीन दोषों पर आधारित होता है- वात, पित्त और कफ. जब ये तीनों संतुलित रहते हैं, तभी शरीर स्वस्थ माना जाता है.
समय को भी तीन भागों में बांटा गया है, भूतकाल, वर्तमान और भविष्य. इन तीनों के बिना समय की अवधारणा अधूरी मानी जाती है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सृष्टि को तीन लोकों में बांटा गया है- आकाश, पृथ्वी और पाताल. यही तीनों मिलकर पूरे ब्रह्मांड की संरचना को दिखाते हैं.
किसी भी चीज को संतुलित रखने के लिए सबसे छोटी संख्या तीन ही होती है. जैसे एक स्टूल के तीन पैर होते हैं, जो उसे स्थिरता देते हैं.