March 6, 2026
कर्नाटक सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाने का बड़ा ऐलान किया है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 6 मार्च 2026 को 2026-27 का राज्य बजट पेश करते हुए यह घोषणा की. यह भारत में पहली ऐसी राज्य-स्तरीय नीति है, जो बच्चों के बढ़ते मोबाइल उपयोग के नकारात्मक प्रभावों को रोकने के लिए उठाया गया साहसिक कदम है.
कर्नाटक सरकार ने 2026-27 के ₹4.48 लाख करोड़ के बजट में घोषणा की कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया का उपयोग पूरी तरह बैन होगा. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बजट भाषण में कहा, 'बच्चों पर मोबाइल के बढ़ते उपयोग के प्रतिकूल प्रभावों को रोकने के उद्देश्य से, 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जाएगा.
यह नीति दुनिया भर में चल रहे ट्रेंड का हिस्सा है. ऑस्ट्रेलिया पिछले साल 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध लगा चुका है, जहां प्लेटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक, टिकटॉक और यूट्यूब को युवा यूजर्स को ब्लॉक करना पड़ता है या भारी जुर्माना भरना पड़ता है.
सरकार का कहना है कि अत्यधिक सोशल मीडिया उपयोग से बच्चों में साइबरबुलिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, हानिकारक सामाजिक तुलना, चिंता, अवसाद और नींद की कमी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं.
समर्थकों का तर्क है कि यह प्रतिबंध कई लाभ देगा. बच्चों को हिंसक, भ्रामक या अनुपयुक्त सामग्री से दूर रखेगा, जो उनकी उम्र के लिए ठीक नहीं होती. मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होगा, क्योंकि ऑनलाइन तुलना से आत्मसम्मान कम होने की समस्या घटेगी।.
हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि पूर्ण प्रतिबंध से कुछ नुकसान भी हो सकते हैं. सोशल मीडिया किशोरों के लिए साथियों से जुड़ने, पहचान बनाने और सपोर्ट पाने का महत्वपूर्ण माध्यम है. ICMR की 2026 रिपोर्ट में पाया गया कि सामाजिक रूप से अलग-थलग किशोरों में ऑनलाइन कटने से तनाव बढ़ा.
प्रतिबंध की सबसे बड़ी समस्या है इसका क्रियान्वयन. प्लेटफॉर्म्स को मजबूत आयु-सत्यापन सिस्टम लगाना होगा, लेकिन बच्चे झूठ बोलकर, साझा अकाउंट्स या VPN का इस्तेमाल करके आसानी से बायपास कर सकते हैं. ऑस्ट्रेलिया में भी अनुपालन में दिक्कतें आईं और कानूनी चुनौतियां बनी हुई हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ प्रतिबंध काफी नहीं. डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम, माता-पिता का सक्रिय मार्गदर्शन, स्कूलों में काउंसलिंग और प्लेटफॉर्म्स द्वारा सुरक्षित डिजाइन (जैसे बेहतर पैरेंटल कंट्रोल) ज्यादा टिकाऊ समाधान हैं.
यह नीति भारत में बच्चों की ऑनलाइन आदतों को आकार देने का एक बड़ा प्रयोग बनेगी. अगर सही ढंग से लागू हुई तो अन्य राज्य भी इसे अपनाएंगे, लेकिन सफलता प्रवर्तन, शिक्षा और बच्चों के अधिकारों-कल्याण के बीच संतुलन पर टिकी है.