क्या ISRO का Privatisation होगा या क्या अब देश के स्पेस सेक्टर को प्राइवेट कंपनियों के लिए खोल जाएगा? इस सवाल पर इंडियन स्पेस एसोसिएशन के DG रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एके भट्ट ने स्टेट मिरर हिंदी के साथ खास बातचीत में कहा कि यह निराधार है. सच यह है कि 450 से अधिक प्राइवेट कंपनियां पहले ही इसरो के साथ मिलकर काम कर रही हैं. भारतीय स्पेस फ्रेमवर्क के तहत रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और मुख्य सैटेलाइट निर्माण का प्राथमिक जिम्मा इसरो का ही है, लेकिन इसरो के चेयरमैन ने स्पष्ट किया है कि भारत की तेजी से बढ़ती जरूरतों को अकेले इसरो द्वारा पूरा करने में काफी वक्त लगेगा. ऐसे में देश की बढ़ती मांग को समय पर पूरा करने के लिए प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बेहद जरूरी है. इसरो और प्राइवेट कंपनियां एक-दूसरे की विरोधी नहीं, बल्कि पूरक (Complementary) बनकर काम करेंगी. AI और आधुनिक तकनीक के इस दौर में कई ऐसी विशेषज्ञताएं हैं, जहां प्राइवेट सेक्टर की क्षमताएं इसरो के लिए मददगार साबित हो सकती है.