दबदबा है, दबदबा रहेगा यह लाइन बृजभूषण शरण सिंह की राजनीति को बखूबी परिभाषित करती है. उत्तर प्रदेश की कैसरगंज सीट से कई बार सांसद रह चुके बृजभूषण शरण सिंह एक ऐसे नेता माने जाते हैं, जिनकी सियासी पकड़ सिर्फ पद से नहीं, बल्कि ज़मीनी प्रभाव, बेबाक बयानबाज़ी और समर्थकों की मजबूत फौज से बनती है. हाल ही में “अखिलेश का एहसान नहीं भूलूंगा” जैसे बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दिया है. क्या यह आने वाले सियासी समीकरणों का संकेत है या शक्ति प्रदर्शन का नया अध्याय? समर्थक इसे आत्मविश्वास मानते हैं, तो विरोधी इसे दबाव की राजनीति बताते हैं.