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Noida में मौत का गड्ढा कहां से आया, इंजीनियरिंग छात्र के मामले में अब तक क्या-क्या हुआ?

नोएडा के सेक्टर-126 में इंजीनियरिंग छात्र की डूबकर मौत के बाद 'मौत का गड्ढा' चर्चा का केंद्र बन गया है. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, यह गड्ढा अधूरे निर्माण स्थल पर पानी भरने से बना था, जहां पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं थे. फिलहाल मामले की जांच जारी है.

Noida में मौत का गड्ढा कहां से आया, इंजीनियरिंग छात्र के मामले में अब तक क्या-क्या हुआ?
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मोहम्मद रज़ा
By: मोहम्मद रज़ा3 Mins Read

Updated on: 9 April 2026 1:10 PM IST

नोएडा के सेक्टर-94 में सामने आए “मौत के गड्ढे” ने एक बार फिर शहर में निर्माण स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इंजीनियरिंग छात्र की डूबकर हुई मौत के बाद यह मामला तेजी से चर्चा में है. शुरुआती जानकारी के अनुसार, जिस जगह यह हादसा हुआ वहां निर्माण कार्य अधूरा पड़ा था और गड्ढे में पानी भर गया था, जिसे लेकर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए थे.

अब तक की जांच में सामने आया है कि जमीन का स्वामित्व और प्रोजेक्ट से जुड़े मामले पहले से विवाद में थे और यह मामला आर्बिट्रेशन में चल रहा था. घटना के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है, पोस्टमार्टम कराया जा चुका है और पूरे मामले में लापरवाही की जिम्मेदारी तय करने की कोशिश की जा रही है.

नहाने के दौरान हुआ हादसा

गाजियाबाद के इंदिरापुरम निवासी छात्र हर्षित भट्ट पानी में उतरते ही अचानक गहराई में चला गया. साथियों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन वह डूब गया. सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय गोताखोर मौके पर पहुंचे और उसे बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

तीन अन्य छात्रों की बची जान

हर्षित को बचाने के प्रयास में तीन अन्य छात्र भी पानी में उतर गए थे. हालांकि, समय रहते उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. राहत की बात यह रही कि उनकी हालत सामान्य बताई जा रही है.

कहां से आया गड्ढा?

जिस निर्माण स्थल पर यह हादसा हुआ, वह जमीन उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण निगम (UPRNN) के कब्जे में बताई जा रही है. यहां सुरक्षा के लिए कर्मी भी तैनात किए गए थे. इसके बावजूद इस तरह की घटना ने सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. बताया जा रहा है कि इस जमीन के स्वामित्व को लेकर साल 2022 से मामला आर्बिट्रेशन में चल रहा है. उसी वर्ष हुई 205वीं बोर्ड बैठक में तत्कालीन CEO रितु माहेश्वरी ने UPRNN के साथ किया गया करार रद्द कर दिया था और इस प्रोजेक्ट को PPP मॉडल पर विकसित करने का प्रस्ताव पास किया गया था.

पोस्टमार्टम और आगे की प्रक्रिया

घटना के बाद देर रात छात्र का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसकी वीडियोग्राफी भी करवाई गई है. फिलहाल अंतिम संस्कार मृतक के पिता के आने के बाद ही किया जाएगा. बताया जा रहा है कि हर्षित के पिता भारतीय सेना में तैनात हैं और इस समय लेह-लद्दाख में पोस्टेड हैं.

यह घटना एक बार फिर यह सवाल उठाती है कि आखिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए जाते, ताकि इस तरह की दुखद घटनाओं को रोका जा सके.

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