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आखिर दिल्ली में क्यों धरने पर बैठे अंकिता भंडारी के माता-पिता? पहले हिरासत, फिर रिहाई; पिता ने सरकार को दी बड़ी चेतावनी

अंकिता भंडारी के माता-पिता को इंडिया गेट पर धरने के दौरान दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया और बाद में रिहा कर दिया. उनके साथ कांग्रेस भी आई है. आखिर क्या है पूरा मामला

आखिर दिल्ली में क्यों धरने पर बैठे अंकिता भंडारी के माता-पिता? पहले हिरासत, फिर रिहाई; पिता ने सरकार को दी बड़ी चेतावनी
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अंकिता भंडारी के माता-पिता और इंडिया गेट पर धरना दे रहे कांग्रेस के सभी प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को रिहा कर दिया. कांग्रेस ने इस बात की जानकारी दी है. पार्टी के मुताबिक, रिहाई के बाद अंकिता के माता-पिता अपने एक रिश्तेदार के घर रहने के लिए चले गए हैं.

दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को गुरुवार तड़के करीब 4 बजे हिरासत में लिया था. इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस नेताओं ने कड़ी नाराजगी जताई. उन्होंने पुलिस पर प्रदर्शनकारियों के साथ धक्का-मुक्की करने और अंकिता के लिए न्याय की मांग कर रहे लोगों को निशाना बनाने का आरोप लगाया.

आखिर अंकिता का परिवार क्यों कर रहा था धरना प्रदर्शन?

यह धरना भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के विरोध में दिया जा रहा था. प्रदर्शनकारी मांग कर रहे थे कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित VIP एंगल की जांच पूरी होने तक उनकी नियुक्ति पर रोक लगाई जाए. अंकिता के माता-पिता भी इसी मांग को लेकर धरने पर बैठे थे. उनका कहना था कि मामले में कथित VIP एंगल की केंद्रीय जांच पूरी होने तक दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति रद्द की जानी चाहिए.

मीडिया से क्या बोले अंकिता भंडारी के पिता?

दिल्ली पुलिस की हिरासत में लिए जाने के बाद अंकिता भंडारी के पिता ने बस के अंदर से मीडिया से बात की. उन्होंने कहा कि जब तक उनकी बेटी को न्याय नहीं मिलता, तब तक देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे. अंकिता के पिता ने कहा, "अगर न्याय नहीं मिलता है, तो मेरी बेटी को न्याय मिलने तक पूरे देश में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे."-

उन्होंने आगे कहा, "सबसे पहली मांग यह है कि दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द की जाए. अगर उनकी नियुक्ति रद्द नहीं की जाती है, तो हमें एक बार फिर पूरे देश में सड़कों पर उतरना पड़ेगा. मेरी बेटी को न्याय मिलना चाहिए."

क्या कांग्रेस परिवार के साथ आई?

इससे पहले बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने धरनास्थल पर पहुंचकर अंकिता के परिवार से मुलाकात की थी. अंकिता भंडारी उत्तराखंड के एक रिजॉर्ट में काम करती थीं. सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई थी. 24 सितंबर 2022 को उनका शव चिल्ला नहर से बरामद हुआ था.

इस मामले में रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को 30 मई 2025 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. तीनों को हत्या, सबूत मिटाने और अन्य अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था.

कांग्रेस ने क्या कहा?

अंकिता के माता-पिता और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के बाद कांग्रेस नेताओं सुप्रिया श्रीनेत, पवन खेड़ा और काजी निजामुद्दीन ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की निंदा की. उन्होंने सवाल उठाया कि न्याय की मांग कर रहे पीड़ित परिवार के साथ इस तरह का व्यवहार क्यों किया गया. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, "यह क्रूरता है. आप देख सकते हैं कि इंडिया गेट पर लोकतंत्र खत्म होता नजर आ रहा है. सुबह 4 बजे लोकतंत्र खत्म हो रहा है."

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब प्रदर्शनकारी दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कर रहे थे, तो अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लेने की जरूरत क्यों पड़ी. कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी पुलिस की कार्रवाई को कठोर बताया. उन्होंने कहा कि अंकिता के माता-पिता पिछले चार साल से न्याय की मांग कर रहे हैं.

सुप्रिया श्रीनेत ने क्या कहा?

श्रीनेत ने कहा, "यह कैसी कार्रवाई है? चार साल से न्याय की मांग कर रहे बेबस माता-पिता के खिलाफ इतनी बेरहम कार्रवाई की जा रही है. उन्हें न्याय दिलाने के बजाय सरकार मुख्य आरोपी को राज्यपाल नियुक्त कर रही है और फिर माता-पिता के साथ इतनी क्रूरता से पेश आ रही है." वहीं, कांग्रेस नेता काजी निजामुद्दीन ने कहा कि जब तक पार्टी की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उसका अभियान जारी रहेगा.

कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ धक्का-मुक्की की गई. पार्टी ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि अंकिता के परिवार और उनके लिए न्याय की मांग कर रहे लोगों के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है.

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