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वरुथिनी एकादशी 2026: रोगों से मुक्ति और सौभाग्य के लिए 13 अप्रैल को करें ये अचूक उपाय

13 अप्रैल 2026 को पड़ने वाली वरुथिनी एकादशी को बेहद शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत और खास उपाय करने से रोगों से राहत मिलती है. इस आर्टिकल को स्टेट मिरर के लिए टैरो, एंजल कार्ड्स रीडर खुशी साहा ने लिखा है.

वरुथिनी एकादशी 2026: रोगों से मुक्ति और सौभाग्य के लिए 13 अप्रैल को करें ये अचूक उपाय
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( Image Source:  AI SORA )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत3 Mins Read

Updated on: 12 April 2026 1:37 PM IST

हिंदू धर्म में वरुथिनी एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है. साल 2026 में यह एकादशी 13 अप्रैल को पड़ रही है, जिसे आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ स्वास्थ्य लाभ और सौभाग्य से भी जोड़ा जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विशेष उपाय करने से जीवन की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और व्यक्ति को शारीरिक व मानसिक शक्ति मिलती है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वरुथिनी एकादशी के दिन किए गए कुछ अचूक उपाय न केवल पापों का नाश करते हैं, बल्कि लंबे समय से चल रही बीमारियों से राहत दिलाने में भी सहायक माने जाते हैं. ऐसे में यह दिन भगवान विष्णु की कृपा पाने और जीवन में सुख-समृद्धि लाने का एक खास अवसर बन जाता है.

वरुथिनी एकादशी का महत्व

‘वरुथिनी’ का अर्थ होता है ‘रक्षा करने वाला’ या ‘कवच’. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन भगवान विष्णु के वराह अवतार को समर्पित है, जो संकटों को दूर करने और जीवन में स्थिरता लाने के प्रतीक माने जाते हैं. पौराणिक कथा के अनुसार, राजा मांधाता ने इस व्रत के प्रभाव से अपनी खोई हुई शक्ति वापस पाई थी. इसलिए यह एकादशी न सिर्फ पापों से मुक्ति दिलाती है, बल्कि शरीर और मन को भी सशक्त बनाती है.

रोगों से राहत के लिए 3 प्रभावी उपाय

इस दिन “ॐ नमो भगवते वराहाय” मंत्र का 108 बार जाप करना बेहद लाभकारी माना जाता है. यह मंत्र मानसिक शांति देने के साथ शरीर की ऊर्जा को संतुलित करता है और नकारात्मकता को दूर करता है.

जल और कुंभ दान

वरुथिनी एकादशी पर मिट्टी के घड़े में पानी भरकर दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है. मान्यता है कि यह उपाय शरीर की आंतरिक गर्मी को शांत करता है और पुराने रोगों से राहत दिलाने में सहायक होता है.

तिल से स्नान

इस दिन स्नान के पानी में काले तिल डालकर स्नान करना शुभ माना जाता है. यह न सिर्फ त्वचा के लिए फायदेमंद है, बल्कि धार्मिक मान्यता के अनुसार यह शरीर और मन से नकारात्मक ऊर्जा को भी दूर करता है.

सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा का अवसर

वरुथिनी एकादशी केवल व्रत रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि और जीवन में संतुलन लाने का अवसर भी देती है. यदि इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ उपाय किए जाएं, तो व्यक्ति को स्वास्थ्य लाभ, मानसिक शांति और सौभाग्य की प्राप्ति हो सकती है.

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