Jagannath Rath Yatra 2026: किसने बनाई थी भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां? रखी थी ये शर्त जो नहीं हुई पूरी
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां अपने अनोखे रूप के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं. पौराणिक कथा के अनुसार, इन मूर्तियों का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने किया था, लेकिन उन्होंने काम शुरू करने से पहले एक खास शर्त रखी थी.
किसने बनाई थी भगवान जगन्नाथ की मूर्ति
हर साल निकलने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा को हिंदू धर्म के सबसे बड़े और पवित्र पर्वों में गिना जाता है. इस दौरान भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य रथों पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर तक जाते हैं. इस यात्रा में लाखों श्रद्धालु शामिल होकर भगवान के दर्शन करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की लकड़ी की मूर्तियां किसने बनाई थीं? पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन मूर्तियों का निर्माण देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा ने किया था. हालांकि, उन्होंने मूर्तियां बनाने से पहले एक ऐसी शर्त रखी थी, जो पूरी नहीं हो सकी. यही वजह मानी जाती है कि आज भी भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां अपने अनोखे और अधूरे स्वरूप में दिखाई देती हैं.
कहां मिली थी मूर्ति के लिए पवित्र लकड़िया?
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पौराणिक मान्यता के अनुसार, राजा इंद्रद्युम्न भगवान विष्णु के परम भक्त थे. एक दिन वे पुरी के समुद्र तट पर घूम रहे थे. तभी उनकी नजर समुद्र में तैर रही दो विशाल लकड़ियों पर पड़ी. राजा को तुरंत भगवान का दिया हुआ संकेत याद आया और उन्होंने समझ लिया कि इन्हीं पवित्र लकड़ियों से भगवान की मूर्तियां बनाई जानी हैं. इसके बाद उन्होंने उन लकड़ियों को समुद्र से निकलवाकर सुरक्षित स्थान पर रखवा दिया.
किसने बनाई जगन्नाथ भगवान की मूर्ति?
कथा के अनुसार, भगवान की आज्ञा से देवताओं के दिव्य शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा एक साधारण बढ़ई का रूप धारण करके राजा इंद्रद्युम्न के पास पहुंचे. उन्होंने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां बनाने की जिम्मेदारी स्वीकार की, लेकिन इसके लिए उन्होंने एक खास शर्त रखी.
क्या थी भगवान विश्वकर्मा की शर्त?
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विश्वकर्मा ने राजा से कहा कि मूर्तियां बनाते समय उन्हें पूरी तरह अकेला छोड़ा जाए. जब तक उनका काम पूरा न हो जाए, तब तक कोई भी व्यक्ति कमरे का दरवाजा न खोले और न ही उन्हें परेशान करे. यदि किसी ने बीच में दरवाजा खोला, तो वह उसी समय अपना काम अधूरा छोड़ देंगे. राजा इंद्रद्युम्न ने यह शर्त मान ली और विश्वकर्मा एक बंद कक्ष में मूर्तियां बनाने लगे.
क्यों भगवान के हाथ-पैर दिखते हैं अधूरे?
कई दिनों तक कमरे से कोई आवाज नहीं आई. इससे राजा और रानी चिंतित हो गए. उन्हें लगा कि कहीं बढ़ई के साथ कोई अनहोनी तो नहीं हो गई. चिंता में आकर राजा ने तय समय पूरा होने से पहले ही कमरे का दरवाजा खुलवा दिया. जैसे ही दरवाजा खुला, विश्वकर्मा वहां से अदृश्य हो गए. मान्यता है कि इसी कारण भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां पूरी तरह तैयार नहीं हो सकीं और उनके हाथ-पैर आज भी अधूरे दिखाई देते हैं.
क्यों निकाली जाती है जगन्नाथ रथ यात्रा?
मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ हर वर्ष अपने भक्तों को दर्शन देने और अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर जाने के लिए रथ यात्रा निकालते हैं. यह यात्रा भगवान और भक्तों के प्रेम, समानता और आस्था का प्रतीक मानी जाती है. इसी वजह से पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा दुनिया की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक यात्राओं में गिनी जाती है.




