खोलते तेल से भरी कढ़ाई में थैली समेत डाल दिया खाने का सामान, कितना है खतरनाक, पॉलिथीन से हो सकता है कैंसर?
वायरल वीडियो में एक शख्स खौलते तेल में पॉलिथिन डाल देता है, जिसने सेहत को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है. प्लास्टिक की थैली को खौलते तेल में डालकर खाना पकाने से केमिकल खाने में मिल सकते हैं, लेकिन क्या इससे कैंसर होता है? अमेरिकन कैंसर सोसायटी के मुताबिक, माइक्रोप्लास्टिक से इंसानों में कैंसर होने का पुख्ता सबूत अभी नहीं मिला है.
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें खाने के सामान को प्लास्टिक की थैली समेत खौलते तेल से भरी कड़ाही में डालते हुए दिखाया गया है. यह देखकर लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं. आखिर गर्म तेल में प्लास्टिक डालकर खाना पकाना कितना खतरनाक हो सकता है? क्या थैली के पिघलने से उसमें मौजूद केमिकल खाने में मिल जाते हैं और ऐसा खाना खाने से कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है?
दरअसल, प्लास्टिक को तेज गर्मी के संपर्क में लाना सही नहीं है. इससे उसमें मौजूद कुछ रसायन खाने में पहुंच सकते हैं, इसलिए इस तरह खाना पकाने से बचना चाहिए. लेकिन क्या प्लास्टिक से सचमुच कैंसर होता है? इस सवाल पर अमेरिकन कैंसर सोसायटी का कहना है कि फिलहाल इतने पुख्ता सबूत नहीं हैं, जिनके आधार पर यह कहा जा सके कि माइक्रोप्लास्टिक इंसानों में कैंसर पैदा करता है. हालांकि, शुरुआती रिसर्च में शरीर में सूजन, डीएनए को नुकसान और दूसरे बदलावों की आशंका जरूर सामने आई है, जिन पर अभी और अध्ययन की जरूरत है.
गर्म तेल में प्लास्टिक डालना क्यों है खतरनाक?
आमतौर पर प्लास्टिक की थैलियां सामान रखने या एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए इस्तेमाल होती हैं. इन्हें खौलते तेल में डालकर खाना पकाने के लिए नहीं बनाया जाता है. जब ऐसी थैली तेज गर्मी के संपर्क में आती है, तो वह अपना आकार खो सकती है, पिघल सकती है या टूटने लग सकती है.
क्या प्लास्टिक से होता है कैंसर?
Grok के मुताबिक, प्लास्टिक बनाने में इस्तेमाल होने वाले कुछ रसायन, जैसे प्लास्टिसाइजर और दूसरे एडिटिव्स, गलत इस्तेमाल की स्थिति में खाने में पहुंच सकते हैं. इनमें कुछ तरह के प्लास्टिक में पाए जाने वाले फ्थैलेट्स भी शामिल हो सकते हैं. खासकर तेल जैसे चिकनाई वाले खाद्य पदार्थों के संपर्क में कुछ रसायनों के पहुंचने की आशंका रहती है. हालांकि, हर प्लास्टिक की थैली में एक जैसे रसायन हों, यह जरूरी नहीं है.
अमेरिकन कैंसर सोसाइटी क्या कहती है?
अमेरिकी कृषि विभाग की जानकारी के मुताबिक, अगर प्लास्टिक की पैकेजिंग को बहुत ज्यादा गर्म किया जाए और वह पिघलने या खराब होने लगे, तो उसमें मौजूद कुछ रसायन खाने में मिल सकते हैं. FDA और अमेरिकन कैंसर सोसायटी का कहना है कि फिलहाल ऐसे ठोस वैज्ञानिक सबूत नहीं मिले हैं, जिनसे यह साबित हो सके कि माइक्रोप्लास्टिक के कारण इंसानों में कैंसर होता है.
FSSAI के क्या हैं नियम?
भारत में FSSAI के नियम भी खाने-पीने की चीजों के मामले में प्लास्टिक के इस्तेमाल को लेकर सख्त हैं. नियमों के तहत रिसाइकिल प्लास्टिक से बने कैरी बैग का इस्तेमाल खाद्य पदार्थों को पैक करने, रखने या एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए नहीं किया जा सकता है.




