TIME100 NEXT में 2 भारतीयों के नाम, Vaibhav Sooryavanshi के अलावा Pawan Kumar Chandana को कितना जानते हैं आप?
TIME100 Next में जगह बनाने वाले दो भारतीयों की कहानी बिल्कुल अलग है. Vaibhav Sooryavanshi ने क्रिकेट में कम उम्र में बड़े रिकॉर्ड बनाए हैं, जबकि Pawan Kumar Chandana ने रॉकेट और स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है.
किसी ने क्रिकेट के मैदान पर छोटी उम्र में बड़े-बड़े रिकॉर्ड बनाकर अपनी पहचान बनाई, तो किसी ने रॉकेट की दुनिया में भारत के निजी स्पेस सेक्टर को नई उड़ान देने का सपना देखा. यही दो अलग कहानियां हैं Vaibhav Sooryavanshi और Pawan Kumar Chandana की, जिनके नाम TIME100 Next में शामिल किए गए हैं. एक बल्ले से अपनी पहचान बना रहा है, तो दूसरा अंतरिक्ष की नई संभावनाओं पर काम कर रहा है.
वैभव सूर्यवंशी 15 साल के यंग क्रिकेटर हैं, जिन्होंने वर्ल्ड कप फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने 80 गेंदों पर 175 रन की पारी खेली. वहीं पवन कुमार चंदना ने ISRO की नौकरी छोड़कर Skyroot Aerospace की नींव रखी और प्राइवेट रॉकेट मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में काम किया.
कौन हैं पवन कुमार चंदना
एक समय पवन कुमार चंदना ने गणित में सिर्फ 51 नंबर पाए थे, लेकिन उनके पिता ने हिम्मत नहीं हारी और उन्हें IIT-JEE की तैयारी करवाई. मेहनत के दम पर उन्होंने IIT Kharagpur में दाखिला लिया और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में BTech-MTech की पढ़ाई पूरी की. कॉलेज के दिनों में ही उनका रुझान रॉकेट और अंतरिक्ष की दुनिया की ओर बढ़ गया और आगे चलकर यही उनका जुनून बन गया.
क्यों छोड़ी थी पवन चंदना ने ISRO की नौकरी?
instagram-@pawan.k.chandana
instagram-@pawan.k.chandana
साल 2012 में पवन कुमार चंदना ने ISRO में काम शुरू किया और करीब छह साल तक वहां अलग-अलग रॉकेट प्रोजेक्ट्स पर काम किया. इसी दौरान उनके मन में अपना रॉकेट बनाने और भारत में प्राइवेट स्पेस कंपनी खड़ी करने का विचार आया. आखिरकार 2018 में उन्होंने ISRO की नौकरी छोड़ दी और Naga Bharath Daka के साथ मिलकर Hyderabad में Skyroot Aerospace शुरू की. उनके लिए यह बड़ा फैसला था, क्योंकि उन्हें बिजनेस का कोई एक्सपीरियंस नहीं था.
Skyroot को कैसे मिली फंडिंग?
Skyroot को आगे बढ़ाने के लिए पवन कुमार चंदना को इंवेस्टमेंट की जरूरत थी. उन्होंने LinkedIn के जरिए इंटरप्रेन्योर Mukesh Bansal से कॉन्टैक्ट किया और अपनी कंपनी के आइडिया के बारे में बताया. इसके बाद उन्हें फंडिंग मिली और Skyroot ने रॉकेट बनाने के अपने काम को तेजी से आगे बढ़ाया. आज कंपनी में 1,000 से ज्यादा लोग काम कर रहे हैं और इसकी वैल्यू करीब 1.1 अरब डॉलर बताई जाती है.
Vikram-S से लेकर Vikram-1 तक किया लॉन्च
18 नवंबर 2022 को Skyroot Aerospace ने श्रीहरिकोटा से Vikram-S को लॉन्च किया. यह भारत की किसी प्राइवेट कंपनी का पहला रॉकेट लॉन्च था. इस मिशन को ‘प्रारंभ’ नाम दिया गया और रॉकेट करीब 88.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचा. इसके साथ तीन ग्राहक पेलोड भी भेजे गए. इसके बाद Skyroot की नजर और बड़े लक्ष्य पर थी. कंपनी ने Vikram-1 पर काम शुरू किया, जिसे छोटे सैटेलाइट को धरती की निचली कक्षा यानी Low Earth Orbit तक पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है. 2026 में इसकी पहली ऑर्बिटल उड़ान के साथ कंपनी ने अपने सफर में एक और अहम कदम आगे बढ़ाया.
कौन हैं वैभव सूर्यवंशी?
instagram-@vaibhav_sooryavanshi09
instagram-@vaibhav_sooryavanshi09
इस खास लिस्ट में Vaibhav Sooryavanshi का नाम भी शामिल है. बिहार के इस बाएं हाथ के बल्लेबाज ने बहुत छोटी उम्र में IPL तक पहुंचकर सबको चौंका दिया. 2025 में उन्होंने राजस्थान रॉयल्स के साथ अपना IPL सफर शुरू किया, लेकिन 2026 का सीजन उनके लिए यादगार बन गया. इस सीजन वैभव ने 16 मैचों में 776 रन बनाए और उनका स्ट्राइक रेट 237.30 रहा. उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 72 छक्के भी जड़े. अपने इस शानदार प्रदर्शन के बाद उन्होंने Orange Cap के साथ MVP और Emerging Player का अवॉर्ड भी हासिल किया.
U-19 वर्ल्ड कप में भी दिखा दम
IPL में शानदार प्रदर्शन के बाद 2026 में वैभव ने भारत की अंडर-19 टीम के लिए भी अपना जलवा दिखाया. इंग्लैंड के खिलाफ वर्ल्ड कप फाइनल में उन्होंने सिर्फ 80 गेंदों पर 175 रन ठोक दिए. उनकी इस पारी ने भारत को खिताब जीतने में बड़ी मदद की. पूरे टूर्नामेंट में वैभव ने 439 रन बनाए और उन्हें Player of the Tournament चुना गया. इसके बाद उनके करियर ने एक और बड़ा मोड़ लिया. वैभव को सीनियर भारतीय टीम में जगह मिली और 2026 में उन्होंने अपना T20I डेब्यू किया. यानी बहुत कम उम्र में वह घरेलू क्रिकेट से IPL, अंडर-19 वर्ल्ड कप और फिर टीम इंडिया तक का सफर तय कर चुके हैं.




