आपके राज्य में कब होगी जनगणना? UP-पंजाब समेत इन राज्यों में क्यों अलग रहेंगी तारीखें, क्या पूछा जाएगा और क्या नहीं? FAQ में जानें सब कुछ
Census 2027 में आधार कार्ड या वोटर आईडी दिखाना जरूरी है या नहीं? जानें जनगणना की तारीखें, सेल्फ एन्यूमरेशन, किराएदारों की गिनती और 10 जरूरी सवालों के जवाब.
Census 2027
भारत में अगली जनगणना यानी Census 2027 की तारीखों का ऐलान हो चुका है. करीब 16 साल बाद देश में जनसंख्या से जुड़े नए आंकड़े जुटाए जाएंगे. सरकार के मुताबिक, ज्यादातर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक जनसंख्या की गिनती होगी. इससे पहले लोगों को 10 से 24 जनवरी तक घर बैठे अपनी जानकारी खुद दर्ज कराने यानी सेल्फ एन्यूमरेशन का विकल्प मिलेगा. लेकिन क्या जनगणना के दौरान आधार कार्ड, वोटर आईडी या कोई दूसरा दस्तावेज दिखाना जरूरी होगा? घर में रहने वाले लोगों से कौन-कौन से सवाल पूछे जाएंगे? क्या किराए के मकान में रहने वालों की भी गिनती होगी और क्या परिवार के सभी सदस्यों का नाम दर्ज कराना जरूरी है? इसके अलावा उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और कुछ अन्य राज्यों में जनगणना की तारीखें अलग क्यों रहेंगी? आइए आसान सवाल-जवाब में Census 2027 से जुड़ी हर जरूरी जानकारी समझते हैं.
Census 2027 के लिए 10 जरूरी FAQ
ज्यादातर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जनसंख्या की गिनती 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक होगी. जनगणना की संदर्भ तारीख 1 मार्च 2027 की आधी रात तय की गई है.
जनगणना के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेज जमा करना जरूरी नहीं है. गणनाकर्मी आपसे जरूरी जानकारियां पूछेंगे, जिनका सही जवाब देना होगा. हालांकि, किसी विशेष प्रक्रिया के लिए अलग आधिकारिक निर्देश जारी हों तो उन्हें देखना चाहिए.
सरकार ने सेल्फ एन्यूमरेशन यानी स्वयं-गणना का विकल्प दिया है. इसके तहत 10 से 24 जनवरी 2027 तक निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जानकारी दर्ज कराई जा सकेगी. पोर्टल का लिंक और लॉगिन प्रक्रिया सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होने पर देखी जा सकती है.
जनगणना के दौरान मकान का प्रकार, दीवार और छत की सामग्री, कमरों की संख्या, पेयजल, बिजली, शौचालय और रसोई जैसी सुविधाओं की जानकारी ली जा सकती है. इसके अलावा टीवी, फ्रिज, वाहन और परिवार के सदस्यों से जुड़ी जानकारियां भी पूछी जाती हैं.
हां, जनगणना में किराए के मकान में रहने वाले परिवारों और उनके सदस्यों की भी गिनती होगी. इसमें मकान अपना है या किराए का, जैसी जानकारी दर्ज की जा सकती है. मकान मालिक होना जनगणना में शामिल होने की शर्त नहीं है.
जनगणना में घर में रहने वाले परिवार के सदस्यों की जानकारी जुटाई जाएगी. इसमें नाम, उम्र, जन्मतिथि, लिंग, वैवाहिक स्थिति और परिवार के मुखिया से संबंध जैसी जानकारियां शामिल हो सकती हैं. अंतिम सवालों की सूची आधिकारिक प्रश्नावली के अनुसार होगी.
जारी अधिसूचना में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और गोवा को निर्धारित कार्यक्रम से बाहर रखा गया है. मणिपुर और कुछ बर्फीले इलाकों के लिए भी अलग व्यवस्था है. इन क्षेत्रों में जनगणना की तारीखों को लेकर अलग सरकारी घोषणा का इंतजार करना होगा.
जनगणना की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी. - पहला चरण: मकानों की सूची तैयार करना और आवास से जुड़ी जानकारी जुटाना. - दूसरा चरण: जनसंख्या की गिनती करना और लोगों से संबंधित जानकारी एकत्र करना.
जनगणना के दौरान जुटाई गई व्यक्तिगत जानकारी को कानूनी प्रावधानों के तहत गोपनीय रखा जाता है. इसका इस्तेमाल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए किया जाता है. जनगणना अधिनियम, 1948 में व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता से जुड़े प्रावधान हैं.
अगर जनगणना के दौरान कोई जानकारी गलत दर्ज होती है, तो गणनाकर्मी से उसे जांचने और सुधारने के बारे में पूछें. सरकार ने 1 से 5 मार्च 2027 तक रिविजनल राउंड भी निर्धारित किया है. सुधार की वास्तविक प्रक्रिया और समय-सीमा के लिए आधिकारिक निर्देशों का पालन करें.




