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Published on: 2026-01-09 11:08:18

CPEC और शक्सगाम घाटी पर भारत का कड़ा रुख: चीन-पाक समझौते को बताया अवैध, MEA ने जताया विरोध

क्षेत्र में बढ़ती चीनी आक्रामकता को लेकर भारत ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है. विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के तहत शक्सगाम घाटी में किया जा रहा चीनी इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण पूरी तरह भारत की संप्रभुता का उल्लंघन है. MEA प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि शक्सगाम घाटी भारतीय क्षेत्र का हिस्सा है और भारत ने कभी भी 1963 के तथाकथित चीन-पाक सीमा समझौते को मान्यता नहीं दी है. उन्होंने कहा कि यह समझौता पूरी तरह से अवैध और अमान्य है.

रणधीर जायसवाल ने यह भी दोहराया कि भारत CPEC को मान्यता नहीं देता, क्योंकि यह परियोजना भारतीय क्षेत्र से होकर गुजरती है, जो पाकिस्तान के अवैध और जबरन कब्जे में है. उन्होंने जोर देकर कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के सभी केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं. MEA के अनुसार, यह रुख चीन और पाकिस्तान दोनों को कई बार स्पष्ट रूप से बताया जा चुका है. भारत ने शक्सगाम घाटी में जमीनी हकीकत बदलने की चीन की कोशिशों के खिलाफ लगातार विरोध दर्ज कराया है. विदेश मंत्रालय ने अंत में साफ शब्दों में कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है.

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