Share Market में चौथे दिन भी गिरावट, सेंसेक्स 570 अंक टूटा-निफ्टी 22500 के नीचे; जानें बाजार के क्रैश होने की 5 बड़ी वजहें
1 अक्टूबर को सेंसेक्स 570 अंक गिरकर बंद हुआ और निफ्टी भी 22500 के नीचे आ गया. जानिए विदेशी बिकवाली, कच्चे तेल और रुपये समेत बाजार में आई गिरावट की 5 बड़ी वजह...
Share Maket Crash: शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई. कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में भारी बिकवाली देखने को मिली. हालांकि, आखिरी घंटों में बाजार ने निचले स्तर से अच्छी रिकवरी की, लेकिन दोनों प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए.
बीएसई सेंसेक्स 570.59 अंक यानी 0.79 फीसदी गिरकर 71,909.70 पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई निफ्टी 50 में भी 198.50 अंक यानी 0.88 फीसदी की गिरावट आई. यह 22,421.95 पर बंद हुआ.
लगातार चौथे दिन लाल निशान पर बंद हुआ सेंसेक्स और निफ्टी
कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक समय 1,050 अंक से ज्यादा टूटकर 71,292.88 के निचले स्तर पर पहुंच गया था. निफ्टी भी गिरकर 22,217.30 पर आ गया. यह इसका 52 सप्ताह के निचले स्तर 22,182.55 के काफी करीब था. हालांकि, अंतिम घंटों में खरीदारी लौटने से बाजार ने अपनी गिरावट का बड़ा हिस्सा कम कर लिया. इसके बावजूद दोनों प्रमुख सूचकांक लगातार चौथे दिन लाल निशान में बंद हुए.
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी आई गिरावट
गुरुवार को केवल बड़ी कंपनियों के शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली. निफ्टी मिडकैप 100 में 1.01% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 करीब 0.97% टूटकर बंद हुआ. इस बीच, बाजार में अस्थिरता का संकेत देने वाला इंडिया VIX 7.46 फीसदी उछलकर 14.50 पर पहुंच गया. कारोबार के दौरान यह 15.69 के स्तर तक भी गया. इससे बाजार में निवेशकों की बढ़ती सतर्कता का संकेत मिला.
शेयर बाजार में क्यों आई गिरावट?
- विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली: भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। 30 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 10,148.41 करोड़ रुपये की निकासी की. इसके उलट घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने इसी दिन 11,271.73 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे. घरेलू निवेशकों की खरीदारी के बावजूद विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार पर दबाव बनाए हुए है. खासतौर पर बड़ी कंपनियों के शेयरों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर प्रमुख सूचकांकों पर दिखाई दे रहा है.
- अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल से बढ़ी चिंता: अमेरिका में सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ा है. बाजार रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड करीब 5.3 फीसदी तक पहुंच गई, जबकि 30 साल के बॉन्ड की यील्ड 5.6% के पार चली गई. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेशकों के लिए डॉलर आधारित निवेश ज्यादा आकर्षक हो सकता है. ऐसे में उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी की निकासी बढ़ने की आशंका रहती है. भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली पहले से जारी है. ऐसे में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने बाजार की चिंताओं को और बढ़ा दिया.
- डॉलर के मुकाबले 96 के पार पहुंचा रुपया: गुरुवार को रुपये में भी कमजोरी देखने को मिली. डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा 96 के स्तर को पार कर गई. रुपया करीब 95.9850 प्रति डॉलर तक कमजोर हुआ. डॉलर में मजबूती, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की वजह से रुपये पर दबाव बना. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है. ऐसे में रुपये की कमजोरी से तेल आयात महंगा हो सकता है, जिसका असर देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है.
- 100 डॉलर के करीब पहुंचा कच्चा तेल: कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी शेयर बाजार की चिंता बढ़ाई. गुरुवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई. भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी कई स्तरों पर चुनौती पैदा करती है. इससे आयात बिल बढ़ने के साथ रुपये पर दबाव और महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है. इससे कंपनियों की उत्पादन और परिवहन लागत भी बढ़ सकती है। हालांकि, अमेरिका- ईरान के बीच तनाव कम होने और संभावित शांति समझौते की उम्मीदों से पहले तेल की कीमतों को कुछ राहत मिली थी, लेकिन ऊंचे स्तर पर बने रहने से निवेशक सतर्क रहे.
- ऑटो शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली: गुरुवार को ऑटो सेक्टर बाजार के सबसे कमजोर क्षेत्रों में शामिल रहा. निफ्टी ऑटो इंडेक्स 3.46% गिरकर बंद हुआ। सितंबर की बिक्री के आंकड़ों के बाद कई ऑटो कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली. बजाज ऑटो की घरेलू दोपहिया वाहनों की बिक्री में सालाना आधार पर 9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. वहीं, महिंद्रा एंड महिंद्रा की ट्रैक्टर बिक्री 21 फीसदी घटी. हालांकि, कंपनी की कुल बिक्री में 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. शेयर बाजार में मारुति सुजुकी का शेयर 4.59 फीसदी गिरा. महिंद्रा एंड महिंद्रा में 3.27 फीसदी, जबकि टाटा स्टील में 3.01 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. बजाज फाइनेंस का शेयर में भी 2.48 फीसदी की गिरावट देखने को मिली. ऑटो शेयरों में आई इस गिरावट ने बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर अतिरिक्त दबाव बनाया.
आईटी शेयरों ने बाजार को संभाला
बाजार में चौतरफा बिकवाली के बीच आईटी शेयरों ने कुछ राहत दी। निफ्टी आईटी इंडेक्स 2.17 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ और प्रमुख सेक्टरों में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वालों में शामिल रहा. सेंसेक्स में इंफोसिस का शेयर 4.02 फीसदी चढ़कर सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज करने वाला शेयर रहा.
टीसीएस में 1.43 फीसदी और एचसीएल टेक्नोलॉजीज में 1.38 फीसदी की तेजी आई. इसके अलावा. एचडीएफसी बैंक का शेयर 1.36 फीसदी और कोटक महिंद्रा बैंक का शेयर 0.53 फीसदी बढ़कर बंद हुआ. दूसरी ओर, मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा स्टील, अडानी पोर्ट्स और इटरनल में गिरावट रही. अडानी पोर्ट्स का शेयर 2.69 फीसदी और इटरनल का शेयर 1.86 फीसदी टूटकर बंद हुआ.
निचले स्तर से रिकवरी, लेकिन बाजार की गिरावट बरकरार
गुरुवार को कारोबार के दौरान बाजार में भारी बिकवाली के बाद अंतिम घंटों में खरीदारी देखने को मिली. इससे सेंसेक्स और निफ्टी अपने दिन के निचले स्तर से काफी ऊपर आ गए. हालांकि, आईटी और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी के बावजूद बाजार लगातार चौथे दिन गिरावट के साथ बंद हुआ. विदेशी निवेशकों की बिकवाली, रुपये की कमजोरी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच निवेशकों की नजर अब आने वाले कारोबारी सत्रों पर रहेगी।.




