ईरान में नहीं बदलने वाले हालात, बिना हिजाब गाना गाने पर 74 कोड़ों की सजा, कौन है वो सिंगर जिस पर 2 साल का बैन भी लगा?

यूट्यूब पर लाइव कॉन्सर्ट और बिना हिजाब प्रदर्शन के बाद ईरानी अदालत ने गायिका व उनकी टीम पर लगाया दो साल का प्रतिबंध, मानवाधिकार संगठनों ने फैसले को बताया क्रूर.

( Image Source:  Instagram: parastoo.ahmadi.musician )
Edited By :  रूपाली राय
Updated On : 19 Jun 2026 10:39 AM IST

ईरान में कलाकारों और अपनी आवाज़ उठाने वाले नागरिकों के खिलाफ सरकार का सख्त रवैया थमने का नाम नहीं ले रहा है. हाल ही में आई एक बेहद चौंकाने वाली खबर के अनुसार, प्रसिद्ध ईरानी सिंगर परस्तू अहमदी (Parastoo Ahmadi) और उनकी प्रोडक्शन टीम के आठ संगीतकारों को एक लाइव कॉन्सर्ट में प्रदर्शन करने के लिए 74 कोड़े मारने की दर्दनाक सजा सुनाई गई है. यह कॉन्सर्ट साल 2024 में अहमदी के आधिकारिक यूट्यूब (YouTube) चैनल पर लाइव स्ट्रीम किया गया था.

क्या है पूरा मामला और अदालत का फैसला?

अदालती दस्तावेजों से मिली जानकारी के मुताबिक, ईरान के क़ोम प्रांत की एक आपराधिक अदालत ने इन कलाकारों को न केवल कोड़े मारने की सजा दी है, बल्कि उन पर कई तरह के कड़े प्रतिबंध भी लगा दिए हैं. अदालत के आदेश के अनुसार, सभी दोषी कलाकारों के देश छोड़ने पर दो साल का प्रतिबंध रहेगा. वे अगले दो सालों तक किसी भी प्रकार की आर्टिस्टिक एक्टिविटीज  (संगीत, कला आदि) में भाग नहीं ले सकेंगे. अदालत ने उन पर आरोप लगाया है कि उन्होंने इंटरनेट पर 'अश्लील और अनैतिक कंटेंट' बनाकर और उसे पब्लिश करके सार्वजनिक शालीनता और सामाजिक नियमों का उल्लंघन किया है. हालांकि, ईरान की आधिकारिक न्यायिक समाचार एजेंसी ने अभी तक इस फैसले को सार्वजनिक नहीं किया.

'अज़ खूने जवानाने वतन' और विवाद की शुरुआत

इस पूरे विवाद की जड़ दिसंबर 2024 में हुआ एक लाइवस्ट्रीम प्रदर्शन है. 29 वर्षीय सिंगर परस्तू अहमदी ने बिना हिजाब पहने ईरान का एक मशहूर देशभक्ति गीत 'अज़ खूने जवानाने वतन' गाया था. यह वीडियो सोशल मीडिया पर देखते ही देखते वायरल हो गया और यूट्यूब पर इसे लाखों लोगों ने देखा, वीडियो के सामने आने के तुरंत बाद, ईरानी अधिकारियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए परस्तू अहमदी और उनके साथी संगीतकारों को हिरासत में ले लिया था. हालांकि, उस समय उन्हें कुछ समय बाद रिहा कर दिया गया था, लेकिन बाद में सरकार ने इस वीडियो को लेकर उनके खिलाफ एक औपचारिक कानूनी मामला दर्ज कर लिया, जिसका नतीजा अब इस खौफनाक सजा के रूप में सामने आया है.

मानवाधिकार संगठनों और जानकारों की राय

इस फैसले के बाद दुनिया भर के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और वकीलों में भारी आक्रोश है. बहार गांधेहारी सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान की वकालत निदेशक का कहना है कि सिर्फ एक गाना गाने और बिना हिजाब के कैमरे के सामने आने के लिए किसी को 74 कोड़े मारना बेहद क्रूर है. ईरानी अधिकारी दुनिया के सामने अपनी छवि सुधारने के लिए कितना भी झूठा प्रचार क्यों न कर लें, लेकिन सच यह है कि ईरान के भीतर मानवाधिकारों की जमीनी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है. सरकार के प्रचार और असल हकीकत के बीच एक बहुत बड़ी खाई है.' दादबन संस्था के मानवाधिकार वकील मोइन खजेली ने कहा, 'ईरानी आपराधिक कानून के अनुसार, महिलाओं का गाना गाना, संगीत का प्रदर्शन करना या म्यूजिक एल्बम बनाना कोई कानूनी अपराध नहीं है. इसलिए, इस साधारण से संगीत प्रदर्शन को 'अश्लील सामग्री का निर्माण या वितरण' कहना पूरी तरह से गलत है। इस सजा का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है.'

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