करीब 6 साल बाद पिथौरागढ़ में भारत-चीन सीमा पर स्थित लिपुलेख दर्रा अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक सड़क मार्ग जून 2026 में खोले जाने की तैयारियां युद्ध-स्तर पर शुरू हो गई हैं. तब जब चीन से व्यापार के फेर में फंसा भारत बीते वित्तीय वर्ष (2025-2026) में 100 अरब डॉलर से ज्यादा का आर्थिक नुकसान उठाए बैठा है. वह चीन जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की भारत के खिलाफ बम-बारुद से भरपूर मदद की थी. ऐसे में अब इस मार्ग को खोलना भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मजबूरी है या फिर जरूरी है? स्टेट मिरर हिंदी के एडिटर इनवेस्टीगेशन संजीव चौहान के सवाल के जवाब में बता रहे हैं भारत के मशहूर अर्थशास्त्री डॉ. शरद कोहली.