यह कहानी सिर्फ ईरान की सत्ता की नहीं, बल्कि भारत की मिट्टी से निकलकर दुनिया की सबसे कठोर धार्मिक व्यवस्था तक पहुंचने वाली एक ऐतिहासिक विरासत की है. इस कहानी की शुरुआत होती है उत्तर प्रदेश के बाराबंकी ज़िले के एक छोटे से कस्बे किंटूर से. वही गांव, जिसने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि उसकी धरती से जुड़ा एक नाम आने वाले वक्त में ईरान की सर्वोच्च धार्मिक सत्ता की नींव से जुड़ जाएगा. किंटूर के रहने वाले सैयद अहमद मुसवी आज ईरानी इतिहास का अहम हिस्सा हैं, लेकिन भारत में उनका ज़िक्र लगभग गुमनाम है.