यूजीसी के नए इक्विटी नियमों को लेकर देश में जारी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणियों ने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय को कटघरे में खड़ा कर दिया है. कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि भारत को जातिविहीन समाज की ओर बढ़ना चाहिए, न कि अमेरिका जैसी व्यवस्था की ओर, जहां भेदभाव संस्थागत रूप ले चुका है. इस पूरे घटनाक्रम पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील सुशील राजा ने भी स्टेट मिरर हिंदी के एडिटर क्राइम इनवेस्टीगेश संजीव चौहान के साथ बातचीत में माना कि इस कानून को लाने में सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से गंभीर चूक हुई है. कोर्ट की सख़्ती के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार को नियमों में बदलाव के लिए मजबूर होना पड़ेगा.