पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी एक बार फिर खुलकर सामने आती दिख रही है. राहुल गांधी संसद और जंतर-मंतर पर छात्रों के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेर रहे थे, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर सांसद चरणजीत सिंह चन्नी उस दौरान पंजाब के फरीदकोट में अपनी अलग रैली कर रहे थे. इस रैली में उन्होंने स्थानीय मुद्दों को उठाने के साथ अपनी राजनीतिक ताकत का भी संदेश दिया. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और उनका खेमा इस कार्यक्रम से दूर रहा, जिससे पार्टी के भीतर दो धड़ों की तस्वीर और साफ हो गई. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 32% दलित आबादी और अपने जनाधार के भरोसे चन्नी खुद को पंजाब कांग्रेस का मजबूत चेहरा मानते हैं. 2024 लोकसभा चुनाव में जालंधर से मिली जीत ने उनके राजनीतिक आत्मविश्वास को और बढ़ाया है. वहीं, पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल लगातार गुटबाजी खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने आलाकमान की चुनौती बढ़ा दी है. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह अंदरूनी संघर्ष 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की राह मुश्किल बना सकता है.