करीब 48 साल बाद पुरी के जगन्नाथ मंदिर के पवित्र रत्न भंडार की गिनती आखिरकार शुरू हो गई है, जिससे पूरे देश में उत्सुकता बढ़ गई है. इस प्रक्रिया की शुरुआत पूरे धार्मिक अनुष्ठान, कड़ी सुरक्षा और तकनीकी निगरानी के साथ की गई है, ताकि पारदर्शिता और सटीकता बनी रहे. माना जाता है कि रत्न भंडार में सोना, चांदी और कीमती रत्नों का बड़ा खजाना है, जिसकी कीमत सैकड़ों करोड़ रुपये से भी ज्यादा हो सकती है. आखिरी बार 1978 में हुई गिनती में 128 किलो से ज्यादा सोना और 221 किलो चांदी मिली थी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि असली खजाना इससे कहीं ज्यादा हो सकता है. अब आधुनिक तकनीक जैसे डिजिटल रिकॉर्डिंग और हाई-रेजोल्यूशन कैटलॉगिंग के जरिए हर वस्तु का सही तरीके से रिकॉर्ड बनाया जा रहा है. यह सिर्फ संपत्ति का मामला नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखने से जुड़ा है.