आसमान छूती सोने चांदी की कीमतें धड़ाम होकर जमीन पर आ गिरी हैं. तो क्या जिस सोने-चांदी को “अशांति” पसंद थी उसे अब ‘शांति’ भाने लगी है? क्या घंटों के हिसाब से जमीन पर आती कीमतों के मद्देनजर सोने-चांदी में निवेश कर डालना चाहिए? क्या मध्य पूर्व और पश्चिम एशिया में ईरान इजराइल के बीच छिड़ी जंग के इस नाजुक दौर में ‘आपदा’ को ‘अवसर’ मानकर सोना चांदी आम-आदमी को खरीद लेना चाहिए? इन्हीं तमाम सवालों के जवाब दे रहे हैं स्टेट मिरर हिंदी के एडिटर इनवेस्टीगेशन संजीव चौहान के सवालों के जवाब मशहूर अर्थशास्त्री डॉ. शरद कोहली.