गोपीनाथ बोरदोलोई सिर्फ असम के पहले मुख्यमंत्री नहीं थे, बल्कि वे उस युग के सच्चे राष्ट्रनिर्माता थे जिन्होंने विभाजन के भयंकर दौर में असम को भारत के हिस्से के रूप में सुरक्षित रखा. उनकी राजनीति में साहस और नैतिकता का अद्भुत मिश्रण था, जिसने ब्रिटिश औपनिवेशिक सत्ता, मुस्लिम लीग की महत्वाकांक्षाओं और आंतरिक राजनीतिक दबावों के बावजूद असम की सांस्कृतिक, भाषाई और राजनीतिक पहचान को बचाया.