नोएडा और दिल्ली में हाल ही में हुई आपदाओं ने हमारे सरकारी तंत्र की अक्षमता और जवाबदेही की कमी को उजागर किया है. जहाँ भारतीय फौज, वायु सेना, थल सेना और नौसेना संकट के समय तुरंत और प्रभावी कार्रवाई करती है, वहीँ नोएडा पुलिस, उत्तर प्रदेश प्रशासन, फायर सर्विस, SDRF और स्टेट रिलीफ टीमें मौके पर पहुँचने में असफल रहीं. 16-17 जनवरी की रात हुए हादसे में युवराज मेहता की जान बचाई जा सकती थी, लेकिन समय पर सही कार्रवाई न होने के कारण उनकी अकाल मौत हुई. SIT रिपोर्ट पांच दिन में आने थी, लेकिन उसकी भी अनदेखी हुई. इस पूरे घटनाक्रम ने दिखाया कि हमारे सिस्टम में अकाउंटेबिलिटी और रिस्पॉन्सिबिलिटी का अभाव है. चाहे गड्ढे में डूबने वाला बच्चा हो या जनकपुरी का कमल ध्यानी, सरकारी तंत्र अक्सर मौके पर मौजूद नहीं रहता और जिम्मेदारी लेने से कतराता है. जबकि फौज हर परिस्थिति में अनुशासन और त्वरित कार्रवाई दिखाती है, आम नागरिकों की सुरक्षा के मामले में सरकारी एजेंसियां नपुंसक साबित होती हैं.