सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 30 सितंबर को उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच के तरीके पर कड़ी नाराजगी जताई. एक क्रिमिनल केस की FIR में पहले आरोपी का नाम खाली छोड़े जाने और बाद में आरोपी का नाम सामने आने के बावजूद उसे FIR में शामिल नहीं किए जाने पर कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अगर पुलिस मामलों को इस तरह संभालेगी तो लोगों का उस पर भरोसा कैसे बना रहेगा.

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी बेहद तल्ख रही. कोर्ट ने यहां तक कहा कि हर चीज में पुलिस का कोई न कोई एजेंडा नजर आता है और बेहतर होगा कि सभी जांचों में CBI को शामिल करने के लिए कहा जाए. कोर्ट ने यह भी कहा कि इससे अच्छा है कि उत्तर प्रदेश पुलिस को ही खत्म कर दिया जाए और यह “बकवास” किसी न किसी मोड़ पर रुकनी चाहिए. आइए 10 प्वाइंट्स में समझते हैं पूरा मामला.

1. मामला एक क्रिमिनल केस से जुड़ा है, जिसमें शुरुआत में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी. FIR में आरोपी का नाम नहीं लिखा गया था.

2. जानकारी के मुताबिक, बाद में आरोपी का नाम सामने आ गया. इसके बावजूद FIR में उसका नाम शामिल नहीं किया गया.

3. FIR में आरोपी का नाम खाली छोड़ने और बाद में नाम सामने आने के बावजूद उसे दर्ज नहीं करने के तरीके पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया.

4. कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस के मामले संभालने के तरीके पर नाराजगी जताई. कोर्ट ने सवाल किया कि अगर मामलों को इस तरह से संभाला जाएगा तो लोग पुलिस पर भरोसा कैसे करेंगे?

5. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस के काम में हर चीज के पीछे कोई न कोई एजेंडा नजर आता है.

6. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बेहतर होगा कि उत्तर प्रदेश पुलिस की सभी जांचों में CBI को शामिल करने के लिए कहा जाए. यह टिप्पणी पुलिस की जांच प्रक्रिया पर कोर्ट की नाराजगी के बीच सामने आई.

7. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि इससे अच्छा है कि उत्तर प्रदेश पुलिस को ही खत्म कर दिया जाए. यह टिप्पणी कोर्ट की नाराजगी के बेहद तल्ख स्तर को दिखाती है.

8. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह “बकवास” किसी न किसी मोड़ पर रुकनी ही चाहिए. कोर्ट ने पुलिस के काम करने के तरीके को लेकर अपनी नाराजगी स्पष्ट रूप से जाहिर की.

9. दी गई जानकारी के मुताबिक, ऐसे कई मौके आए हैं जब सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच या प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं. कुछ मामलों में कोर्ट को लगा कि जांच सही तरीके से नहीं की जा रही है या प्रक्रिया में खामियां हैं.

10. बताया जा रहा है कि यह कोई असाधारण मामला नहीं, बल्कि एक सामान्य क्रिमिनल केस था. इसके बावजूद FIR में आरोपी का नाम दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने इतनी कड़ी टिप्पणियां कीं. कोर्ट की टिप्पणियों का केंद्र पुलिस की जांच प्रक्रिया और उसके प्रति लोगों के भरोसे का सवाल रहा.