नोएडा के पर्थला फ्लाईओवर के पास बिजली और पानी की मांग को लेकर पिछले 22 दिनों से चल रहा धरना FIR के बाद भी जारी है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मुकदमा दर्ज होने से उनकी मांग कमजोर नहीं हुई है. स्टेट मिरर से बातचीत में धरने पर बैठी महिलाओं ने कहा कि जब तक इलाके में बिजली और पानी की व्यवस्था नहीं होती, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि बिजली-पानी की स्थायी और आधिकारिक व्यवस्था चाहिए.

पुलिस ने भारतीय किसान परिषद के अध्यक्ष सुखबीर खलीफा समेत 40 नामजद और करीब 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. FIR में कुल 13 धाराओं का उल्लेख किया गया है. पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों पर सड़क जाम करने, यातायात प्रभावित करने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता, धक्का-मुक्की और मारपीट जैसे आरोप लगाए गए हैं. पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच की जा रही है.

FIR के बाद सुखबीर खलीफा ने क्या कहा?

FIR दर्ज होने के बाद भारतीय किसान परिषद के अध्यक्ष सुखबीर खलीफा ने स्टेट मिरर से बातचीत में कहा कि प्रदर्शनकारी मुकदमे से डरने वाले नहीं हैं. उनका कहना है कि आंदोलन बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर किया जा रहा है. खलीफा के मुताबिक, जब तक सरकार और संबंधित अधिकारी यह स्पष्ट नहीं करते कि इलाके में बिजली और पानी की आधिकारिक व्यवस्था की जाएगी, तब तक धरना जारी रहेगा.

क्या FIR के बाद भी जारी रहेगा बिजली-पानी का धरना?

प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा है कि FIR दर्ज होने के बाद भी वे धरना खत्म करने के पक्ष में नहीं हैं. उनका कहना है कि उनकी मुख्य मांग इलाके में बिजली और पानी की स्थायी व्यवस्था करना है. धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि केवल आश्वासन या मीटर उपलब्ध कराने से समस्या का समाधान नहीं होगा. उनका जोर ऐसी व्यवस्था पर है, जिसमें इलाके में बिजली की सप्लाई के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा भी मौजूद हो.

निजी मीटर को लेकर प्रदर्शनकारियों ने क्या सवाल उठाए?

सुखबीर खलीफा ने बिजली कनेक्शन के लिए निजी मीटर दिए जाने की चर्चा पर भी सवाल उठाया. उन्होंने दावा किया कि इलाके में बिजली के खंभे और तार लगाने के नाम पर लोगों से 10 हजार से 20 हजार रुपये तक मांगे जाने की बातें सामने आ रही हैं. उनका आरोप है कि बिजली की व्यवस्था को दोबारा निजी हाथों में देने की कोशिश की जा रही है. हालांकि, ये आरोप प्रदर्शनकारी पक्ष की ओर से लगाए गए हैं.

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सिर्फ मीटर मिलने से समस्या क्यों नहीं सुलझेगी?

धरने पर बैठे लोगों के मुताबिक, अधिकारियों की ओर से मीटर उपलब्ध कराने की बात कही जा रही है, लेकिन इलाके में बिजली के खंभे और तार ही नहीं हैं. प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि जब बिजली पहुंचाने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा मौजूद नहीं है, तो केवल मीटर उपलब्ध कराने से बिजली की समस्या खत्म नहीं होगी. वे इलाके में पूरी और आधिकारिक बिजली व्यवस्था की मांग कर रहे हैं.

FIR में नाम आने के बाद धरने पर बैठी महिला ने क्या कहा?

धरने में शामिल एक महिला ने भी स्टेट मिरर से बातचीत में अपनी प्रतिक्रिया दी. महिला ने बताया कि FIR में उसका नाम भी दर्ज है, लेकिन इससे वह डरने वाली नहीं है. महिला का कहना है कि प्रदर्शनकारी अपनी बुनियादी जरूरतों को लेकर आवाज उठा रहे हैं और जब तक इलाके में बिजली और पानी की व्यवस्था नहीं होती, तब तक धरना जारी रहेगा.

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग आखिर क्या है?

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग इलाके में बिजली और पानी की स्थायी व्यवस्था किए जाने की है. उनका कहना है कि अधिकारियों की ओर से मीटर उपलब्ध कराने की बात की जा रही है, लेकिन बिजली पहुंचाने के लिए जरूरी खंभे और तार भी लगाए जाने चाहिए. उनका कहना है कि वे ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जो आधिकारिक और स्थायी हो, ताकि इलाके के लोगों को आगे भी बिजली और पानी के लिए इसी तरह प्रदर्शन न करना पड़े.

पुलिस का प्रदर्शनकारियों पर क्या आरोप है?

पुलिस की FIR के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान मुख्य सड़क को बाधित करने और यातायात प्रभावित करने के आरोप लगाए गए हैं. इसके अलावा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की व मारपीट के आरोप भी FIR में शामिल हैं. फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है. दूसरी ओर प्रदर्शनकारी इन आरोपों के बावजूद अपनी बिजली-पानी की मांग को लेकर धरना जारी रखने की बात कह रहे हैं.

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल इस पूरे मामले में दो पक्षों की बातें सामने आ रही हैं. प्रदर्शनकारी बिजली-पानी की स्थायी व्यवस्था की मांग पर धरना जारी रखने की बात कह रहे हैं, जबकि पुलिस ने सड़क बाधित करने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिसकर्मियों से कथित मारपीट समेत कई आरोपों में मामला दर्ज किया है. आगे की स्थिति सरकार और प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदमों के साथ-साथ पुलिस जांच पर निर्भर करेगी.