खुद को समझ रहे रोनाल्डो! जामिया प्रोफेसर ने छात्र को मारी लात, यूजर्स बोले- क्लासरूम या फुटबॉल ग्राउंड?
जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों में घिर गया है. सिविल इंजीनियरिंग विभाग के एक प्रोफेसर का क्लासरूम में छात्र को लात मारने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. इस वीडियो के सामने आने के बाद शिक्षकों के व्यवहार, कैंपस सेफ्टी और छात्र अधिकारों पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं.;
जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते ही बहस के केंद्र में आ गया. वीडियो में सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डॉ. रियाजुद्दीन क्लासरूम के भीतर छात्र के साथ अभद्र व्यवहार करते दिखाई देते हैं. यह दृश्य देखकर लोगों के मन में पहला सवाल यही उठा- क्या पढ़ाने का यही तरीका है? वीडियो के वायरल होते ही कैंपस की सुरक्षा, शिक्षकों की जवाबदेही और छात्रों के अधिकारों पर गंभीर चर्चा शुरू हो गई.
विवाद यहीं नहीं रुका. इस वीडियो के बाद एक अनुसूचित जनजाति (ST) कर्मचारी रामफूल मीणा की शिकायत सामने आई, जिसने मामले को और संवेदनशील बना दिया. हालांकि इस वीडियो से उसका संबंध नहीं है लेकिन ऐसा ही मारपीट का मामला मीणा के साथ हुआ है. मीणा का कहना है कि डॉ. रियाजुद्दीन ने उन्हें गालियां दी और शिकायत करने , लेकिन संदेह के आधार पर उन्हें निशाना बनाया गया. पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली है और जांच जारी है.
वायरल क्लिप और आरोपों की कड़ी
वायरल वीडियो में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रियाजुद्दीन को क्लासरूम में एक छात्र को लात मारते हुए दिखाया जा रहा है. यह क्लिप सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर आक्रोश फैल गया और कई लोगों ने सवाल उठाए कि शिक्षक–छात्र संबंधों की मर्यादा कहां गई. विश्वविद्यालय के भीतर अनुशासन और निगरानी व्यवस्था पर भी उंगलियां उठीं.
इसी कड़ी में रामफूल मीणा की शिकायत ने नया मोड़ ले लिया. मीणा, जो जामिया के पॉलिटेक्निक विभाग में अपर डिवीजन क्लर्क हैं, उनका आरोप है कि वीडियो के बाद उन्हें शक के आधार पर निशाना बनाया गया. उन्होंने कहा कि 13 जनवरी 2026 को उनके साथ कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया और विरोध करने पर अभद्र भाषा बोली गई.
आरोपों का गंभीर सिलसिला
मीणा का दावा है कि मामला 16 जनवरी 2026 को और बिगड़ गया, जब आरोपी प्रोफेसर उनके ऑफिस में आए और उन पर शारीरिक हमला किया. शिकायत के अनुसार, चेहरे पर मुक्के मारे गए, जिससे होंठ फट गए और आंख के नीचे सूजन आ गई. इलाज के लिए उन्हें विश्वविद्यालय के अंसारी हेल्थ सेंटर जाना पड़ा.
मीणा ने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि उन्हें लंबे समय से उनकी पहचान के कारण निशाना बनाया जा रहा था. आरोप है कि कैंपस में उन्हें अपमानजनक संबोधनों से बुलाया गया और उन पर धर्म परिवर्तन का अप्रत्यक्ष दबाव भी डाला गया. ये आरोप विश्वविद्यालयी माहौल में सुरक्षा और समावेशन पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं.
कार्रवाई के बजाय तबादला?
मीणा का कहना है कि जब उन्होंने हमले की शिकायत प्रशासन से की, तो कार्रवाई के बजाय उसी दिन उनका तबादला कर दिया गया. उनके मुताबिक, यह कदम उन्हें चुप कराने और मामले को दबाने की कोशिश जैसा था. इस फैसले के बाद प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं. दिल्ली पुलिस ने पुष्टि की है कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच चल रही है. साथ ही, वायरल वीडियो की भी जांच की जा रही है. इस बीच, छात्र और कर्मचारी संगठनों ने निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई की मांग तेज कर दी है.
कैंपस से बाहर जाती बहस
यह मामला अब सिर्फ एक वीडियो या एक शिकायत तक सीमित नहीं रहा. सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों तक बहस फैल चुकी है कि विश्वविद्यालयों में जवाबदेही कैसे तय होनी चाहिए. शिक्षक के आचरण, प्रशासन की संवेदनशीलता और शिकायतकर्ता की सुरक्षा- तीनों मुद्दे केंद्र में हैं. कई लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाएं संस्थानों की साख को नुकसान पहुंचाती हैं. वहीं, कुछ लोग जांच पूरी होने से पहले किसी नतीजे पर पहुंचने से सावधान रहने की अपील कर रहे हैं.
सीख क्या मिलेगी?
फिलहाल सच जांच के दायरे में है. आरोप गंभीर हैं, वीडियो चौंकाने वाला है और जवाबदेही की मांग तेज. सवाल यह है कि क्या इस प्रकरण से कैंपस में व्यवहार और सुरक्षा को लेकर ठोस सुधार होंगे, या यह भी वक्त के साथ ठंडा पड़ जाएगा. एक बात तो तय है कि छात्रों और कर्मचारियों की गरिमा से जुड़ा कोई भी मामला सिर्फ वायरल ट्रेंड नहीं, बल्कि संस्थागत परीक्षा होता है. जामिया का यह प्रकरण उसी परीक्षा की कसौटी बन चुका है.