Sawan Shivratri 2026: 11 अगस्त को भोलेनाथ की पूजा में न हो जाए ये भूल, इन कामों से खुल सकता है दुर्भाग्य का रास्ता
सावन शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा करते समय कुछ नियमों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है. इस दिन शिवलिंग पर हल्दी, सिंदूर और कुमकुम चढ़ाने से बचें.
सावन शिवरात्रि पर कौन से काम नहीं करने चाहिए
(Image Source: chatgpt )इस बार 11 अगस्त को सावन शिवरात्री मनाई जाएगी. इस दिन भगवान शिव की पूजा और शिवलिंग के अभिषेक का खास महत्व माना जाता है. भक्त इस दिन जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाकर भोलेनाथ की आराधना करते हैं. मान्यता है कि इस दिन पूजा करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि छोटी-सी गलती भी पूजा के तरीके को गलत कर सकती है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन शिवरात्रि पर शिवलिंग पर हल्दी, सिंदूर और कुमकुम नहीं चढ़ाना चाहिए. इसके अलावा मांसाहार, शराब और नशीली चीजों से दूर रहना चाहिए. किसी से झगड़ा करना, अपशब्द बोलना या किसी का अपमान करने से भी बचें.
क्या है सावन शिवरात्रि का शुभ मुहूर्त?
शिवरात्रि पर पूजा-पाठ के साथ कुछ नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी होता है. पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त को सुबह 4:54 बजे से शुरू होगी. इस दिन भद्रा का साया भी है, लेकिन शिव की पूजा में यह मान्य नहीं होता है.
शिवलिंग पर न चढ़ाएं ये चीजें
सावन शिवरात्रि पर भोलेनाथ की पूजा करते समय यह देखना जरूरी माना जाता है कि शिवलिंग पर कौन-सी चीजें अर्पित की जा रही हैं. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक हल्दी, सिंदूर और कुमकुम शिवलिंग पर नहीं चढ़ाना चाहिए. इसके बजाय जल, दूध और बेलपत्र जैसी पूजन सामग्री अर्पित कर भगवान शिव की आराधना करने की परंपरा है.
बेलपत्र चढ़ाते समय न करें गलती
शिव पूजा में बेलपत्र को बेहद शुभ माना जाता है. शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते समय उसकी साफ-सफाई और सही स्थिति का ध्यान रखना चाहिए. पूजा के लिए कटे-फटे, सूखे या खराब पत्तों की जगह साफ और अच्छे बेलपत्र लें और उन्हें श्रद्धा के साथ शिवलिंग पर अर्पित करें.
तामसिक खाने से रहें दूर
सावन शिवरात्रि के दिन मांसाहारी भोजन, शराब और किसी भी तरह के नशे से बचना चाहिए. अगर आप व्रत रखते हैं तो अपनी सेहत और क्षमता के अनुसार फल, दूध या हल्का सात्विक भोजन ले सकते हैं. इस दिन शांत मन से भगवान शिव का ध्यान और पूजा करना शुभ माना जाता है.
शिव पूजा में न करें जल्दबाजी
सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा पूरे ध्यान और शांति के साथ करनी चाहिए. शिवलिंग पर जल, दूध और दूसरी पूजन सामग्री विधि के अनुसार अर्पित करें. मान्यता है कि पूजा में दिखावे से अधिक महत्व भक्त के सच्चे मन, श्रद्धा और अच्छे भाव का होता है.