कौन हैं नेता जी के पोते चंद्र कुमार बोस, जिन्होंने अब छोड़ा TMM का साथ, बताया ये रीजन

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए TMC की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. जानिए उनका राजनीतिक, शैक्षणिक और पेशेवर सफर.

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By :  सागर द्विवेदी
Updated On : 3 Aug 2026 9:41 PM IST

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर उठापटक देखने को मिला है. नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपने इस्तीफे की वजह 'व्यक्तिगत कारण' बताई है. हालांकि, उनके इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है, क्योंकि इससे पहले वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी छोड़ चुके हैं और उस फैसले को अपनी "गलती" तक बता चुके थे.

चंद्र कुमार बोस का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. भाजपा में अहम जिम्मेदारियां निभाने से लेकर टीएमसी में शामिल होने और अब वहां से भी इस्तीफा देने तक, उनकी राजनीति लगातार सुर्खियों में रही है. आइए जानते हैं कि आखिर चंद्र कुमार बोस कौन हैं, उनका राजनीतिक और पेशेवर सफर कैसा रहा और नेताजी की विरासत से उनका क्या संबंध है.

TMC से क्यों दिया इस्तीफा?

चंद्र कुमार बोस ने तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष को संबोधित अपने इस्तीफे में लिखा कि वह तत्काल प्रभाव से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं. उन्होंने पत्र में केवल 'व्यक्तिगत कारणों' का जिक्र किया और किसी राजनीतिक मतभेद या विवाद का उल्लेख नहीं किया. फिलहाल तृणमूल कांग्रेस की ओर से उनके इस्तीफे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

BJP छोड़ने के बाद TMC में हुए थे शामिल

चंद्र कुमार बोस ने वर्ष 2023 में भाजपा से इस्तीफा दिया था. उस समय उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा नेताजी सुभाष चंद्र बोस की समावेशी राष्ट्रवादी सोच को आगे बढ़ाने के अपने वादे पर खरी नहीं उतरी. इसके बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया. टीएमसी में शामिल होते समय उन्होंने कहा था कि राज्य और देश की राजनीति को अधिक समावेशी सोच की जरूरत है. अब कुछ समय बाद उन्होंने टीएमसी से भी इस्तीफा देकर अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.

कौन हैं चंद्र कुमार बोस?

चंद्र कुमार बोस देश के सबसे प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवारों में से एक से आते हैं. वह स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बड़े भाई और वरिष्ठ नेता सरत चंद्र बोस के पौत्र हैं. उनके पिता अमिया नाथ बोस पूर्व सांसद और प्रसिद्ध विधि विशेषज्ञ रहे थे. इसी पारिवारिक विरासत के कारण चंद्र कुमार बोस लंबे समय से सार्वजनिक जीवन और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं. राजनीति में आने से पहले उन्होंने कॉरपोरेट जगत में भी लंबा अनुभव हासिल किया.

कॉरपोरेट दुनिया में भी बनाया नाम

चंद्र कुमार बोस ने अर्थशास्त्र की पढ़ाई लंदन के हेंडन कॉलेज से की. इसके बाद उन्होंने Indian Institute of Management Calcutta से प्रबंधन की शिक्षा प्राप्त की. उन्होंने करीब 18 वर्षों तक Tata Steel में विभिन्न पदों पर काम किया और एरिया सेल्स मैनेजर तक पहुंचे. बाद में वर्ष 2004 में उन्होंने Bose Information Technology Pvt. Ltd. की स्थापना की, जो मानव संसाधन (HR) परामर्श और स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्र में काम करती है.

नेताजी की विरासत को सहेजने में निभाई अहम भूमिका

चंद्र कुमार बोस केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहे. उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विरासत को संरक्षित करने के लिए भी कई अभियान चलाए. वह Open Platform for Netaji के प्रवक्ता रहे हैं और नेताजी से जुड़ी गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग लंबे समय तक उठाते रहे. उनका कहना रहा है कि देश के लोगों को स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े सभी ऐतिहासिक दस्तावेजों तक पहुंच मिलनी चाहिए.

कैसा रहा राजनीतिक सफर?

चंद्र कुमार बोस ने 2016 में भाजपा जॉइन की थी. उसी वर्ष उन्हें पश्चिम बंगाल भाजपा का उपाध्यक्ष बनाया गया. उन्होंने 2016 का विधानसभा चुनाव और 2019 का लोकसभा चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ा, हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिली. साल 2020 में पार्टी के संगठनात्मक फेरबदल के दौरान उन्हें उपाध्यक्ष पद से हटा दिया गया. इसके बाद पार्टी नेतृत्व के साथ उनके मतभेद बढ़ते गए और आखिरकार 2023 में उन्होंने भाजपा छोड़ दी. भाजपा छोड़ते समय उन्होंने कहा था कि पार्टी नेताजी की समावेशी और सर्वधर्म समभाव वाली राष्ट्रवादी सोच को आगे बढ़ाने में विफल रही है. इसके बाद उन्होंने टीएमसी का दामन थामा, लेकिन अब वहां से भी इस्तीफा दे दिया है.

आगे क्या होगा?

चंद्र कुमार बोस के टीएमसी छोड़ने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनका अगला राजनीतिक कदम क्या होगा. फिलहाल उन्होंने किसी नई पार्टी में शामिल होने या सक्रिय राजनीति छोड़ने को लेकर कोई घोषणा नहीं की है. हालांकि, नेताजी के परिवार से जुड़ी उनकी पहचान, पश्चिम बंगाल की राजनीति में उनका अनुभव और उनकी सार्वजनिक छवि को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि आने वाले समय में वह किसी नई भूमिका में नजर आ सकते हैं. फिलहाल उनका इस्तीफा पश्चिम बंगाल की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है.

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