एक साथ आए ये 5 संकट तो दुनिया में मच जाएगा हाहाकार, RBI गवर्नर ने दी बड़ी चेतावनी, AI को कैसे बताया बड़ा खतरा?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने ग्लोबल फाइनेंशियल स्टेबिलिटी के सामने मौजूद 5 बड़े जोखिमों को लेकर चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि ये पांचों खतरे अगर एक साथ आए तो दुनिया भर के देशों को भारी नुकसान होगा.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शनिवार को ग्लोबल फाइनेंशियल स्टेबिलिटी के सामने मौजूद पांच बड़ी कमजोरियों को लेकर आगाह किया. उन्होंने बढ़ता वैश्विक कर्ज, संपत्तियों की ऊंची और दबाव वाली वैल्यूएशन, बढ़ता लीवरेज, प्राइवेट क्रेडिट से जुड़े जोखिम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बढ़ते साइबर खतरे को प्रमुख जोखिम बताया.
संजय मल्होत्रा ने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित 5वें कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव (KEC) में ग्लोबल फाइनेंशियल स्टेबिलिटी के सामने उभरते प्रमुख जोखिमों पर बात की. उन्होंने कहा कि इन पांचों जोखिमों में से कोई एक जोखिम अभी अपने आप में बड़ी फिक्र की वजह नहीं हो सकता है, लेकिन अगर ये सभी झटके एक साथ आते हैं तो ग्लोबल फाइनेंशियस सिस्टम पर काफी दबाव पड़ सकता है.
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से पैदा हुए सप्लाई शॉक को वैश्विक वित्तीय प्रणाली ने अब तक काफी अच्छी तरह संभाला है. हालांकि, वैश्विक आर्थिक माहौल अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है. मल्होत्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया के संघर्ष ने केवल महंगाई के दबाव को नहीं बढ़ाया है, बल्कि फाइनेंशियल सिस्टम से जुड़े जोखिमों को भी बढ़ाया है. उन्होंने इसी संदर्भ में पांच प्रमुख जोखिमों को विस्तार से बताया.
1. बढ़ता वैश्विक कर्ज बना बड़ा जोखिम
RBI गवर्नर ने सबसे पहले वैश्विक कर्ज के बढ़ते स्तर को बड़ी चिंता बताया. उन्होंने कहा कि दुनिया में कर्ज का स्तर बढ़ा है. इसके साथ ही कर्ज की मैच्योरिटी अवधि कम हुई है और बॉन्ड यील्ड बढ़ी है.
उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों का असर सरकारों और कंपनियों दोनों पर पड़ सकता है. सरकारों के लिए ज्यादा ब्याज लागत का मतलब है कि उनके पास खर्च करने के लिए मौजूद पैसों में कमी हो सकती है. इससे कर्ज की स्थिति और खराब हो सकती है. कंपनियों के लिए भी ऊंची उधारी लागत मुश्किलें बढ़ा सकती है. मल्होत्रा के मुताबिक, वैश्विक कर्ज में बढ़ोतरी और कर्ज की बदलती स्थिति वित्तीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण जोखिम बन सकती है.
2. AI को लेकर क्या बोले?
दूसरे बड़े जोखिम के तौर पर उन्होंने संपत्तियों की दबाव वाली यानी बहुत ऊंची वैल्यूएशन का जिक्र किया. इसमें खास तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियां और निवेश शामिल हैं. उन्होंने कहा कि AI में निवेश का चक्र दुनियाभर के वित्तीय बाजारों के लिए एक बड़ा सहारा रहा है. खासकर विकसित अर्थव्यवस्थाओं में AI से जुड़ी कंपनियों की मजबूत कमाई ने उनके शेयरों की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी में मदद की है.
हालांकि, जैसे-जैसे AI में निवेश का मौजूदा दौर आगे बढ़ेगा, इसमें किसी तरह की सुस्ती या AI कंपनियों की कमाई में गिरावट फाइनेंशियल प्रोपर्टी की कीमतों में तेज बदलाव ला सकती है. इसका सबसे ज्यादा असर AI से जुड़ी पूरी वैल्यू चेन पर पड़ सकता है.
मल्होत्रा ने कहा कि ज्यादा जोखिम लेने की प्रवृत्ति ने बाजार में लीवरेज भी बढ़ाया है. इसके साथ अगर बड़ी AI कंपनियों का कैश फ्लो कम होता है, तो बाजार में होने वाला सुधार और तेज हो सकता है. इससे फाइनेंशियल मार्केय में उतार-चढ़ाव भी बढ़ सकता है.
3. बढ़ता लीवरेज भी बड़ी चिंता
तीसरे जोखिम के तौर पर RBI गवर्नर ने वित्तीय बाजारों में बढ़ते लीवरेज को बताया. उन्होंने कहा कि ज्यादा रिटर्न हासिल करने की कोशिश में खासकर विकसित अर्थव्यवस्थाओं में हेज फंड, ऑप्शन सेलर्स, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) और दूसरे नॉन-बैंक फाइनेंशियल इंटरमीडियरीज ने इक्विटी और बॉन्ड बाजारों में अपना लीवरेज बढ़ाया है. लीवरेज का बढ़ना उस समय ज्यादा चिंता का विषय है जब शेयरों की वैल्यूएशन पहले से दबाव में हो. इसके साथ ही बैंकों और नॉन-बैंक फाइनेंशियल इंटरमीडियरीज (NBFIs) के बीच आपसी जुड़ाव भी बढ़ा है.
उन्होंने कहा कि यह जुड़ाव केवल देनदारियों की तरफ ही नहीं, बल्कि एसेट साइड पर भी गहरा हुआ है. ऐसे में अगर वित्तीय परिस्थितियां सख्त होती हैं तो इसका असर बैंकों और दूसरे वित्तीय बाजारों तक पहुंच सकता है.
4. प्राइवेट क्रेडिट में कमजोर लेंडिंग स्टैंडर्ड का जोखिम
चौथे जोखिम के तौर पर संजय मल्होत्रा ने प्राइवेट क्रेडिट को चिन्हित किया. उन्होंने कहा कि यह जोखिम खास तौर पर विकसित देशों में ज्यादा दिखाई देता है. उन्होंने कहा कि प्राइवेट क्रेडिट फाइनेंशियल सिस्टम के लिए एक कमजोरी का स्रोत बन सकता है. इस क्षेत्र में कुछ बेहद चर्चित मामलों में डिफॉल्ट देखने को मिले हैं. इन मामलों से संकेत मिलता है कि कुछ जगहों पर लोन देने के मानक कमजोर या ढीले रहे हैं. RBI गवर्नर ने इस जोखिम को इसलिए महत्वपूर्ण बताया क्योंकि प्राइवेट क्रेडिट में किसी तरह की कमजोरी का असर व्यापक वित्तीय प्रणाली पर पड़ सकता है.
5. AI के कारण बढ़ रहे साइबर खतरे
पांचवें बड़े जोखिम के तौर पर मल्होत्रा ने AI से जुड़े साइबर जोखिमों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि AI के उभरने से साइबर जोखिम के साथ-साथ मॉडल रिस्क, थर्ड-पार्टी पर निर्भरता और इंसानी निगरानी एवं जवाबदेही में कमी जैसे खतरे भी बढ़े हैं. उन्होंने कहा कि उनके विचार में अत्यधिक सक्षम और आधुनिक AI टूल्स के विकास के साथ सबसे तत्काल चिंता साइबर जोखिम को लेकर है. उन्होंने खास तौर पर कहा कि यह फिक्र उन वित्तीय प्रणालियों के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है जो आपस में बहुत गहराई से जुड़ी हुई हैं और जिनकी एक्टिविटी किसी एक देश की सीमा तक सीमित नहीं हैं.
कैसे तबाह हो सकती है दुनिया की इकोनॉमी?
संजय मल्होत्रा ने इन पांचों जोखिमों को अलग-अलग देखने के बजाय इनके एक साथ सामने आने की स्थिति पर ज्यादा चिंता जताई. उन्होंने कहा कि इनमें से हर जोखिम अकेले फिलहाल चिंता का कारण न हो, लेकिन अगर कई झटके एक साथ आते हैं तो वैश्विक वित्तीय ढांचे पर काफी दबाव पड़ सकता है. उनके मुताबिक, वैश्विक वित्तीय व्यवस्था ने पश्चिम एशिया के संघर्ष से पैदा हुए सप्लाई शॉक को अब तक अच्छी तरह संभाला है, लेकिन वैश्विक आर्थिक वातावरण अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है.
भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
RBI गवर्नर ने यह भी बताया कि इन वैश्विक जोखिमों का भारत पर क्या असर हो सकता है. उन्होंने कहा कि भारत एक बड़ी खुली अर्थव्यवस्था है और इसलिए वैश्विक वित्तीय जोखिमों का असर घरेलू वित्तीय प्रणाली पर पड़ना स्वाभाविक है.
उन्होंने कहा कि भारत पश्चिम एशिया के संघर्ष, ऊंची कमोडिटी कीमतों और बाहरी क्षेत्र से जुड़े दबावों के प्रभाव से अभी भी प्रभावित हो सकता है. हालांकि, उनके अनुसार भारत इस स्थिति का सामना मजबूत स्थिति से कर रहा है. उन्होंने भारत की अपेक्षाकृत कम महंगाई और प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के बीच मजबूत आर्थिक वृद्धि को इसकी वजहों में शामिल किया.