महंगाई के दौर में आम आदमी का सहारा बनी पोस्ट ऑफिस की यह स्कीम
महंगाई के इस दौर में पोस्ट ऑफिस की टाइम डिपॉजिट स्कीम आम आदमी के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश बनकर उभरी है. इसमें सरकारी गारंटी के साथ तय रिटर्न मिलता है.;
जब रोजमर्रा की चीजें महंगी होती जा रही हों और बैंकों की ब्याज दरें धीरे-धीरे नीचे आ रही हों, तब आम आदमी के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि अपनी मेहनत की कमाई कहां सुरक्षित रखी जाए, ताकि उस पर अच्छा रिटर्न भी मिले.
ऐसे समय में डाकघर की बचत योजनाएं एक बार फिर लोगों की पहली पसंद बनती दिख रही हैं. वजह साफ है - सरकारी गारंटी, तय रिटर्न और बिना जोखिम के निवेश का भरोसा.
बैंक एफडी से ज्यादा भरोसेमंद पोस्ट ऑफिस टीडी
पोस्ट ऑफिस की फिक्स्ड डिपॉजिट को टाइम डिपॉजिट (TD) कहा जाता है. यह योजना बिल्कुल बैंक की एफडी जैसी है, लेकिन फर्क इतना है कि इसमें केंद्र सरकार की सीधी जिम्मेदारी जुड़ी होती है. पोस्ट ऑफिस में निवेशक 1 साल, 2 साल, 3 साल और 5 साल की अवधि के लिए अकाउंट खुलवा सकते हैं. मौजूदा समय में 1 साल की जमा पर 6.9 प्रतिशत, 2 साल पर 7.0 प्रतिशत, 3 साल पर 7.1 प्रतिशत और 5 साल की जमा पर 7.5 प्रतिशत ब्याज दिया जा रहा है. यही कारण है कि जिन लोगों को शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड का जोखिम नहीं चाहिए, वे इस स्कीम की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं.
आम आदमी को कितना मिलेगा फायदा
अगर कोई व्यक्ति 5 साल की टाइम डिपॉजिट स्कीम में ₹1 लाख निवेश करता है, तो मैच्योरिटी पर उसे करीब ₹1,44,995 मिलते हैं. यानी बिना किसी जोखिम के लगभग ₹44,995 का तय ब्याज. यह रकम उन लोगों के लिए बड़ी राहत है जो बच्चों की पढ़ाई, बेटी की शादी या रिटायरमेंट के लिए सुरक्षित बचत करना चाहते हैं. मौजूदा हालात में कई बड़े बैंक 5 साल की एफडी पर इतना रिटर्न नहीं दे पा रहे हैं, जिससे पोस्ट ऑफिस की यह योजना और ज्यादा आकर्षक बन जाती है.
छोटे निवेशकों के लिए क्यों है यह स्कीम खास
इस योजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें अमीर और गरीब, दोनों को एक जैसा फायदा मिलता है. उम्र या प्रोफेशन के आधार पर ब्याज दर अलग नहीं होती. मजदूर, किसान, दुकानदार या नौकरीपेशा व्यक्ति - हर कोई समान दर पर निवेश कर सकता है. यही वजह है कि यह स्कीम आम आदमी की जरूरतों के हिसाब से बनाई गई लगती है, जहां मुनाफा कम नहीं और खतरा लगभग शून्य होता है.
सरकार तय करती है ब्याज, इसलिए भरोसा ज्यादा
पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं की ब्याज दरें सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा तय की जाती हैं और हर तीन महीने में इनकी समीक्षा होती है. इसका मतलब यह है कि ये दरें किसी निजी कंपनी या बाजार की मर्जी पर नहीं चलतीं. इससे निवेशकों को भरोसा रहता है कि उनका पैसा किसी अस्थिर सिस्टम के भरोसे नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था के तहत सुरक्षित है.
क्यों आम आदमी के लिए बन रही है यह ‘सेफ इनकम मशीन’
महंगाई के इस दौर में जहां लोग यह सोच रहे हैं कि पैसे को कैसे बचाया जाए, वहां पोस्ट ऑफिस की टाइम डिपॉजिट स्कीम आम आदमी के लिए एक तरह की ‘सेफ इनकम मशीन’ बनती जा रही है. इसमें न शेयर बाजार की टेंशन है, न उतार-चढ़ाव का डर और न ही पैसे डूबने की चिंता. तय समय पर तय रकम मिलती है, जो मध्यम वर्ग और बुजुर्गों के लिए सबसे बड़ा सुकून है.
कुल मिलाकर, जब बैंक ब्याज घटा रहे हों और खर्च बढ़ता जा रहा हो, तब पोस्ट ऑफिस की यह स्कीम आम आदमी को यह भरोसा देती है कि उसकी बचत सुरक्षित भी रहेगी और उस पर सम्मानजनक रिटर्न भी मिलेगा. यही वजह है कि यह योजना अब सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि भरोसे का विकल्प बनती जा रही है.