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Explainer: 'फितना अल हिंदुस्तान' क्या, जिसे लेकर भारत ने UN में पाकिस्तान को जमकर लताड़ा

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एकबार फिर से पाकिस्तान को जमकर लताड़ लगाई है. पाकिस्तान द्वारा कुछ आतंकवादी समूहों को ‘फितना अल-हिंदुस्तान’ घोषित करने को लेकर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.

UNSC Meeting Harish Parvathaneni
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UNSC Meeting Harish Parvathaneni

( Image Source:  ANI )

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की हालिया बैठक में भारत ने पाकिस्तान को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया. भारत ने पाकिस्तान द्वारा कुछ आतंकवादी समूहों को ‘फितना अल-हिंदुस्तान’ घोषित किए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे दुष्प्रचार और भ्रामक सूचना फैलाने की रणनीति बताया. भारतीय प्रतिनिधि हरीश परवथानेनी ने कहा कि इस तरह की शब्दावली का इस्तेमाल क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने और घरेलू राजनीतिक उद्देश्यों को साधने के लिए किया जा रहा है.

सिर्फ यही नहीं, भारत ने अफगानिस्तान से जुड़े मुद्दों और पाकिस्तान की सैन्य नीतियों पर भी सवाल उठाए. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश परवथानेनी ने पाकिस्तान की नीतियों की आलोचना करते हुए कई गंभीर टिप्पणियां कीं. आइए समझते हैं कि आखिर यह पूरा विवाद क्या है और भारत ने पाकिस्तान पर इतने तीखे आरोप क्यों लगाए?

क्या है फितना अल-हिंदुस्तान विवाद?

पाकिस्तान सरकार ने 2025 में बलूचिस्तान में सक्रिय कुछ आतंकवादी समूहों और संगठनों को आधिकारिक तौर पर ‘फितना अल-हिंदुस्तान’ की श्रेणी में रखा था. पाकिस्तान का दावा था कि ये समूह देश की सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा हैं. हालांकि भारत ने इस नामकरण पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि यह वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाने और धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल कर राजनीतिक एजेंडा चलाने का प्रयास है.

फितना अल हिंदुस्तान का मतलब क्या?

फितना का एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ 'अशांति', 'विद्रोह', 'गृहयुद्ध' है. इसके अलावा अल हिंदुस्तान का अर्थ 'भारत का' या 'भारत से जुड़ा हुआ' है. पाकिस्तान के नजरिए से फितना अल हिंदुस्तान का मतलब हुआ 'भारत द्वारा फैलाई गई अशांति या विद्रोह'. पाकिस्तान इसका इस्तेमाल अपने देश में अशांति फैलाने वाले विद्रोही और आतंकवादी समूहों को भारत से जोड़ने के लिए करता हैं.

UNSC में भारत ने क्या कहा?

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश परवथानेनी ने पाकिस्तान के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा "यह पाकिस्तान के गुप्त तंत्र द्वारा संचालित नफरत की एक संगठित फैक्ट्री का परिणाम है, जिसका उद्देश्य अपने नागरिकों को भारत के साथ स्थायी शत्रुता की स्थिति में रखना है ताकि वे सत्ता में बने रहें और राष्ट्रीय संसाधनों पर अपना नियंत्रण कायम रख सकें तथा उन्हें मुख्य राजनीतिक और आर्थिक समस्याओं से विचलित कर सकें."

भारत ने इसे दुष्प्रचार क्यों बताया?

हरीश परवथानेनी ने का कहना है कि पाकिस्तान द्वारा अपनाई गई यह रणनीति वास्तविक तथ्यों से ध्यान हटाने की कोशिश है. भारत के अनुसार, किसी समूह को धार्मिक संदर्भों में परिभाषित करना समस्या का समाधान नहीं बल्कि उसे और जटिल बनाता है.

भारत ने अपने बयान में पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था और राजनीतिक ढांचे को भी निशाने पर लिया. भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान में सेना की बढ़ती भूमिका का उल्लेख करते हुए देश की सत्ता संरचना पर सवाल खड़े किए. यह टिप्पणी पाकिस्तान में सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को विस्तारित अधिकार दिए जाने और रक्षा ढांचे में हुए बदलावों के संदर्भ में देखी जा रही है.

अफगानिस्तान मुद्दे पर क्या बोला भारत?

संयुक्त राष्ट्र की बैठक में भारत ने अफगानिस्तान में पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाइयों को लेकर भी चिंता जताई. भारत का कहना है कि सीमा पार सैन्य अभियानों के दौरान नागरिकों की मौतें हुई हैं और इससे क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हुई है. इस मुद्दे पर परवथानेनी ने कहा "मैं फिर से दोहराना चाहता हूं. किसी नरसंहार को सैन्य अभियान का नाम देने से अपराधी बरी नहीं हो जाता। नागरिकों की हत्या करना, उन्हें अपंग करना और अनाथ करना आतंकवाद विरोधी कार्रवाई नहीं है."

भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक चुनौतियों और असफलताओं के लिए लगातार पड़ोसी देशों को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश करता है. ऐसी रणनीतियां न तो क्षेत्रीय शांति के लिए लाभकारी हैं और न ही इससे किसी देश की आंतरिक समस्याओं का समाधान निकल सकता है.

क्षेत्रीय राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?

रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंच पर भारत और पाकिस्तान के बीच तीखे बयान दोनों देशों के संबंधों में तनाव को और बढ़ा सकते हैं. हालांकि भारत का जोर इस बात पर रहा कि आतंकवाद, दुष्प्रचार और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को स्पष्ट और तथ्य आधारित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए.

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