June 25, 2026
वेनेजुएला के बाद अब उन देशों की बात करते हैं जो भूकंप के मुहाने पर बैठे हैं. इस लिस्ट में पहला नाम जापान का है. यह देश पैसिफिक 'रिंग ऑफ फायर' पर स्थित है, जहां दुनिया के सबसे ज्यादा सक्रिय ज्वालामुखी और भूकंपीय क्षेत्र हैं. जापान चार बड़ी टेक्टोनिक प्लेटों के ऊपर बसा है, इसलिए यहां हर साल हजारों छोटे-बड़े झटके महसूस किए जाते हैं.
इंडोनेशिया भी 'रिंग ऑफ फायर' क्षेत्र में आता है. आकार में बड़ा होने के कारण यहां हर साल दर्ज होने वाले भूकंपों की संख्या सबसे अधिक होती है. इंडो-ऑस्ट्रेलियन, यूरेशियन और पैसिफिक प्लेटों के मिलन बिंदु पर होने के कारण यहां बड़े भूकंप और सुनामी का खतरा हमेशा बना रहता है.
चीन में भले ही हर दिन भूकंप न आते हों, लेकिन जब भी यहां बड़ा भूकंप आता है, तो इतिहास गवाह है कि भारी तबाही होती है. भारतीय और यूरेशियन प्लेटों की आपसी टक्कर (जिससे हिमालय पर्वत बना है) के कारण चीन के पश्चिमी और पहाड़ी इलाकों में बड़े भूकंपों का खतरा हमेशा रहता है.
प्रशांत महासागर के किनारे बसा यह द्वीपीय देश भी बेहद संवेदनशील इलाके में आता है. फिलीपींस में न सिर्फ शक्तिशाली भूकंप आते हैं, बल्कि यहां सक्रिय ज्वालामुखियों की संख्या भी बहुत ज्यादा है, जिससे यह देश प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में गिना जाता है.
तुर्की में कई सक्रिय फॉल्ट लाइन्स (दरारों) के बीच फंसा हुआ है. यूरेशियन, अफ्रीकन और अरेबियन प्लेट्स के लगातार दबाव के कारण यहां की जमीन हमेशा अशांत रहती है. पिछले कुछ सालों में तुर्की ने कई बड़े और विनाशकारी भूकंप झेले हैं, जिसने यहां के पूरे बुनियादी ढांचे को हिलाकर रख दिया था.