पाकिस्तानी डॉक्टर इसरार अहमद कौन, जिनका 2010 में हो गया निधन, आयुष बना मोहम्मद अली तो पुलिस ने इसलिए किया जिक्र
शामली के कथित धर्मांतरण केस में पाकिस्तानी डॉक्टर इसरार अहमद का नाम सामने आ रहा है. पुलिस द्वारा आयुष के इस पाकिस्तानी डॉक्टर के साथ संपर्क में होने की बात कही गई, लेकिन ये डॉक्टर साल 2010 में ही मर चुका है.
Ayush Malik Conversion Mohammad Ali
उत्तर प्रदेश के शामली जिले में एक कथित धर्मांतरण मामले ने राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दे दिया है. मामला उस समय चर्चा में आया जब आयुष मलिक नाम का युवक, जो अब मोहम्मद अली के नाम से जाने जाते हैं उसके धर्म परिवर्तन को लेकर परिवार की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए. परिवार का दावा है कि धर्मांतरण के पीछे एक सुनियोजित साजिश हो सकती है, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी.
इस पूरे विवाद के बीच एक ऐसा नाम सामने आया जिसने लोगों को हैरान कर दिया. जांच और बयानबाजी के दौरान पाकिस्तानी डॉ. इसरार अहमद का जिक्र होने लगा. चौंकाने वाली बात यह है कि डॉ. इसरार अहमद का निधन साल 2010 में हो चुका है. ऐसे में सवाल उठने लगे कि आखिर उनका नाम इस मामले में क्यों लिया जा रहा है और वे कौन थे?
क्या है शामली का पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, आयुष मलिक ने करीब 12 साल पहले इस्लाम धर्म स्वीकार किया था और बाद में चांदनी कुरैशी नाम की युवती से निकाह किया. धर्म परिवर्तन के बाद उनका नाम मोहम्मद अली बताया जाता है. हाल ही में यह मामला तब सुर्खियों में आया जब परिवार की ओर से आरोप लगाया गया कि आयुष का धर्मांतरण किसी प्रभाव या साजिश के तहत कराया गया. इसके बाद पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू की और मामला दर्ज किया गया.
क्यों आया डॉ. इसरार अहमद का नाम?
शामली के SP के बयान के बाद यह मामला और चर्चा में आ गया. SP नरेंद्र प्रताप सिंह ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि "पाकिस्तान के एक धर्मगुरू हैं डॉ. इसरार, उनका आपने देखा होगा बहुत ही वीडियो चलता रहता है काफी उनका काम ही है दावत देना. ताकि अन्य धर्म के लोग इस्लाम को अपनाए. मेरे ख्याल से आयुष उनके टच में भी है."
वारिश पठान ने क्या कहा?
इस मामले पर AIMIM नेता वारिश पठान ने पुलिस के बयान पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा "आयुष मलिक, मोहम्मद अली ने मीडिया के सामने कहा है कि मुझे किसी ने फोर्स नहीं किया, मैं अपनी मर्ज़ी से मुस्लिम बना हूं और दाढ़ी रखकर मैंने हज़ूर की सुन्नत अदा की है, मैं नमाज़ पढ़ता हूं, किसी का मुझ पर दबाव नहीं था न है, मेरी बीवी और ससुर को खामाखा परेशान किया जा रहा है."
उन्होंने आगे कहा "यहीं नहीं शामली के एक वरिष्ठ अधिकारी मीडिया को बोल रहे हैं कि ये अभी भी डॉक्टर इसरार अहमद के संपर्क में हो सकता है जो पाकिस्तानी स्कॉलर हैं, जबकि हकीकत ये है कि डॉक्टर इसरार अहमद का 2010 में इंतकाल हो चुका है. मुसलमानों के खिलाफ सिर्फ प्रोपेगैंडा और झूठा भ्रम फैलाया जा रहा है."
कौन थे डॉ. इसरार अहमद?
डॉ. इसरार अहमद पाकिस्तान के जाने-माने इस्लामी धर्मशास्त्री, वक्ता और विचारक थे. उन्हें कुरान आधारित शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार और इस्लामी पुनर्जागरण से जुड़े विचारों के लिए जाना जाता था. उन्होंने 'तनज़ीम-ए-इस्लामी' नामक संगठन की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य इस्लामी मूल्यों और शिक्षाओं को समाज में बढ़ावा देना था. डॉ. इसरार अहमद का जन्म 26 अप्रैल 1932 को भारत के हिसार में हुआ था. विभाजन के बाद उनका परिवार पाकिस्तान चला गया, जहां उन्होंने अपनी शिक्षा और सार्वजनिक जीवन को आगे बढ़ाया.
उन्होंने 1954 में लाहौर के किंग एडवर्ड मेडिकल कॉलेज से चिकित्सा की डिग्री प्राप्त की थी. हालांकि बाद में उनका रुझान धार्मिक अध्ययन की ओर बढ़ा और उन्होंने 1965 में कराची विश्वविद्यालय से इस्लामिक स्टडीज में एमए किया. वे इस्लामी पुनरुत्थान के समर्थक माने जाते थे और उनके विचारों पर इस्लामी चिंतक मौलाना अबुल आला मौदूदी का प्रभाव देखा जाता था. डॉ. इसरार अहमद का 14 अप्रैल 2010 को लाहौर स्थित उनके निवास पर दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था. उस समय उनकी आयु 77 साल थी. यही कारण है कि उनके नाम को लेकर उठे विवाद के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं.




