Begin typing your search...

इतना घिनौना काम क्यों किया था? 47 देशों में बच्चों के अश्लील वीडियो बेचने वाले जेई पति-पत्नी को होगी सजा-ए-मौत

उत्तर प्रदेश के बांदा कोर्ट ने रामभवन और दुर्गावती को बच्चों का यौन शोषण कर उनके अश्लील वीडियो विदेशों में बेचने के लिए फांसी की सजा सुनाई. CBI ने 50+ बच्चों के मामले में आरोप साबित किया.

इतना घिनौना काम क्यों किया था? 47 देशों में बच्चों के अश्लील वीडियो बेचने वाले जेई पति-पत्नी को होगी सजा-ए-मौत
X

उत्तर प्रदेश के बांदा कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐसे मामले पर फैसला सुनाया है, जिसने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया. चित्रकूट में रहने वाले पति-पत्नी, जो बच्चों का यौन शोषण कर डार्क वेब पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अश्लील वीडियो बेचते थे, को कोर्ट ने मरते दम तक फंदे पर लटकाने की सजा सुनाई. सीबीआई की जांच में खुलासा हुआ कि दोनों ने 50 से ज्यादा बच्चों के साथ घिनौना कुकर्म किया और उनका शोषण करके वीडियो बनाया.

इससे पहले 18 फरवरी को पॉक्सो कोर्ट ने दोनों को दोषी ठहराया था. अदालत में जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने स्पष्ट कहा- 'दोनों पति-पत्नी को मरते दम तक फंदे पर लटकाए रखा जाए.' इस घिनौने मामले ने न केवल कानूनी व्यवस्था को चुनौती दी, बल्कि समाज के नैतिक और मानवता के मूल्यों को भी झकझोर कर रख दिया.

ये कौन हैं और कैसे करते थे बच्चों का शोषण?

बांदा के रामभवन (55) चित्रकूट में सिंचाई विभाग में जेई थे, जबकि उनकी पत्नी दुर्गावती (50) हाउसवाइफ थीं. दोनों के कोई संतान नहीं थी. गरीब परिवारों के बच्चों को लालच देकर फंसाना इनका मुख्य तरीका था. बच्चों की उम्र 5 से 16 साल के बीच होती थी.

बच्चों के साथ यह दंपति क्या करता था?

पति-पत्नी दोनों मिलकर बच्चों का कुकर्म करते थे. पत्नी बच्चों से संबंध बनाती थी, जबकि रामभवन उनसे कुकर्म करता था. लैपटॉप और कैमरे के जरिए अश्लील वीडियो बनाकर डार्क वेब पर बेचते थे. जो बच्चा विरोध करता, उसे मार-पीट कर चुप कराया जाता. लालच जैसे पैसे, मोबाइल या खिलौनों से बच्चों को फंसाया जाता.

गिरफ्तारी और सीबीआई की जांच

31 अक्टूबर 2020 को सीबीआई ने रामभवन के खिलाफ केस दर्ज किया. आरोप था कि वह बच्चों के अश्लील वीडियो/फोटो बनाकर अंतरराष्ट्रीय पेडोफाइल नेटवर्क तक पहुंचाता था. 17 नवंबर 2020 को रामभवन और दुर्गावती को गिरफ्तार किया गया.

चार्जशीट कब दाखिल की गई और कितने गवाह थे?

गिरफ्तारी के 88वें दिन 700 पन्नों की चार्जशीट दाखिल हुई. इसमें 4 से 42 साल तक के लोगों के बयान और डिजिटल एविडेंस शामिल थे. कुल 74 गवाह पॉक्सो कोर्ट में पेश किए गए. सीबीआई की जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी 8 लाख रुपये नगद, मोबाइल, लैपटॉप, वेबकैम, पेन ड्राइव और मेमोरी कार्ड समेत इलेक्ट्रॉनिक स्टोरेज डिवाइस इस्तेमाल कर रहे थे.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बच्चों का शोषण

पॉक्सो कोर्ट के अधिवक्ता कमल सिंह ने बताया कि इस दंपति ने चीन, अमेरिका, ब्राजील और अफगानिस्तान समेत 47 देशों में बच्चों के अश्लील वीडियो और फोटो बेचे. उनके शिकार बच्चों का इलाज दिल्ली AIIMS में किया गया.

यह गंदा खेल कैसे पकड़ा गया?

जवाब: इंटरपोल ने सूचना दी कि एक व्यक्ति 3 मोबाइल नंबरों से 7 से 18 साल के बच्चों के पोर्न वीडियो बनाकर इंटरनेट में अपलोड कर रहा था. पेन ड्राइव में 34 वीडियो और 679 फोटो मिली. ट्रेसिंग के बाद पता चला कि रामभवन और दुर्गावती यह काम कर रहे थे.

कोर्ट का आदेश और पीड़ित बच्चों की मदद

पॉक्सो कोर्ट के जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने आदेश दिया कि दोनों को मरते दम तक फंदे पर लटकाया जाए. साथ ही अधिवक्ता ने मांग की कि पीड़ित बच्चों को 10-10 लाख रुपए की राशि दी जाए. यह मामला समाज और कानून के लिए एक चेतावनी है कि कोई भी शासकीय पद या शिक्षा घिनौने अपराध को नहीं ढक सकता.

UP NEWScrime
अगला लेख