मां बेसुध, पिता की आंखें नम! ट्विशा शर्मा की चिता के सामने रो पड़ा परिवार, सुप्रीम कोर्ट से बेटी को इंसाफ मिलने की जताई उम्मीद
भोपाल में ट्विशा शर्मा का अंतिम संस्कार कर दिया गया, लेकिन परिवार की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है. सुप्रीम कोर्ट के स्वत: संज्ञान लेने के बाद परिवार को उम्मीद जगी है कि बेटी को इंसाफ मिलेगा और मामले की निष्पक्ष जांच होगी.
ट्विशा शर्मा का भोपाल में हुआ अंतिम संस्कार
Twisha Sharma Family Demands Justice After Funeral: भोपाल के श्मशान घाट में रविवार को जब ट्विशा शर्मा की चिता जली, तो सिर्फ एक बेटी का अंतिम संस्कार नहीं हुआ… एक परिवार के सपने, भरोसे और मुस्कुराहटें भी राख में बदल गईं. जिस बेटी को कुछ महीने पहले हंसी-खुशी विदा किया गया था, उसी बेटी को अब सफेद कपड़ों में, आंखों में आंसुओं का समंदर लिए परिवार ने हमेशा के लिए अलविदा कह दिया. हर तरफ सिर्फ सन्नाटा था… और उस सन्नाटे में सबसे ज्यादा गूंज रहा था एक सवाल- आखिर ट्विशा की गलती क्या थी?
श्मशान घाट में पिता की आंखें सूख चुकी थीं. मां बेसुध थी. रिश्तेदारों के कंधों पर सिर्फ अर्थी नहीं, बल्कि इंसाफ की उम्मीद भी टिकी हुई थी. परिवार बार-बार यही कह रहा था कि उनकी बेटी ने दहेज और मानसिक प्रताड़ना के खिलाफ लड़ते-लड़ते दम तोड़ दिया, लेकिन अब उसकी मौत को भी दबाने की कोशिश हो रही है.
ट्विशा के चचेरे भाई ने क्या कहा?
ट्विशा के चचेरे भाई आशीष शर्मा की आवाज में दर्द साफ सुनाई दे रहा था. उन्होंने कहा कि दूसरे पोस्टमॉर्टम के लिए परिवार को दर-दर भटकना पड़ा. अगर अदालतें आगे नहीं आतीं, तो शायद सच हमेशा के लिए दफन हो जाता. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के स्वत: संज्ञान लेने को परिवार के लिए उम्मीद की आखिरी किरण बताया.
परिवार का क्या आरोप है?
परिवार का आरोप है कि ट्विशा की मौत के बाद भी आरोपियों ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई. उल्टा, उसकी छवि पर सवाल उठाकर एक 'पोस्टह्यूमस कैरेक्टर ट्रायल' चलाने की कोशिश की गई, ताकि असली मुद्दों से ध्यान हटाया जा सके. परिवार का कहना है कि उनकी बेटी को जिंदा रहते हुए भी मानसिक रूप से तोड़ा गया और मौत के बाद भी उसकी गरिमा को नहीं छोड़ा गया.
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल उन लोगों पर उठ रहा है, जिन पर कानून की रक्षा करने की जिम्मेदारी थी. परिवार ने सीधे तौर पर पति Samarth Singh और उसके परिवार, खासकर रिटायर्ड जज Giribala Singh पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि रसूख और सिस्टम के सहारे मामले को कमजोर करने की कोशिश हुई.
सुप्रीम कोर्ट से परिवार को है आखिरी उम्मीद
जब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया, तो देशभर में लोगों को लगा कि शायद अब ट्विशा की चिता की आग बेकार नहीं जाएगी. अदालत ने 'संस्थागत पक्षपात' और जांच में गड़बड़ियों पर चिंता जताई है. यही वजह है कि अब इस केस को सिर्फ एक दहेज हत्या नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनशीलता की परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है.
भोपाल की उस चिता के सामने खड़े लोग सिर्फ रो नहीं रहे थे… वे अंदर से टूट चुके थे. हर किसी की जुबान पर एक ही बात थी, “अगर ट्विशा जैसी पढ़ी-लिखी, आत्मनिर्भर लड़की भी सुरक्षित नहीं थी, तो आखिर कौन सुरक्षित है?” अब परिवार की आखिरी उम्मीद सुप्रीम कोर्ट से है. उन्हें उम्मीद है कि उनकी बेटी के साथ जो हुआ, उसका सच सामने आएगा… और जो लोग जिम्मेदार हैं, उन्हें कानून के सामने जवाब देना होगा, क्योंकि ट्विशा अब वापस नहीं आएगी, लेकिन अगर इंसाफ नहीं मिला, तो समाज एक और बेटी खो देगा.




