मेरा परिवार मिलने क्यों नहीं आता... पहले आग में जले परिवार के 8 लोग, अब अस्पताल में राधे श्याम की भी मौत, पूरी फैमिली का ऐसा दुखद अंत
दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में 3 जून को लगी भीषण आग ने एक पूरे अग्रवाल परिवार को खत्म कर दिया. इस हादसे में पहले परिवार के 8 सदस्यों की मौत हो गई थी, जबकि 80 वर्षीय राधे श्याम अग्रवाल अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे थे.
दिल्ली के मालवीय नगर में 3 जून की सुबह लगी आग सिर्फ एक होटल को नहीं जला रही थी. उस आग में एक पूरा परिवार, उसकी पीढ़ियां, उसकी हंसी, उसके सपने और उसका भविष्य राख हो रहा था.
कुछ दिन पहले तक गुरुग्राम के सेक्टर-46 में स्थित अग्रवाल परिवार का घर सामान्य भारतीय परिवारों की तरह ही आबाद था. घर में बुजुर्ग पिता थे, बेटा था, बहू थी, पोतियां थीं और रिश्तेदारों का आना-जाना था. लेकिन एक सप्ताह के भीतर सब कुछ बदल गया. आज उस घर का दरवाजा तो है, दीवारें भी हैं, लेकिन उन्हें अपना कहने वाला कोई नहीं बचा.
कहानी शुरू होती है 80 वर्षीय राधे श्याम अग्रवाल से.
उम्र और बीमारी ने उन्हें अस्पताल के बिस्तर तक पहुंचा दिया था. साकेत के मैक्स अस्पताल में वह जिंदगी और मौत के बीच लड़ाई लड़ रहे थे. परिवार उनकी देखभाल के लिए गुरुग्राम से दिल्ली आया हुआ था. अस्पताल से बार-बार आने-जाने में परेशानी न हो, इसलिए बेटे विवेक अग्रवाल ने परिवार के साथ अस्पताल के सामने स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में कमरा ले लिया. शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह फैसला पूरे परिवार की किस्मत बदल देगा.
विवेक अग्रवाल पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट थे. परिवार में उनकी मां प्रेमलता अग्रवाल थीं, पत्नी तर्जनी अग्रवाल थीं, जो कभी मिसेज इंडिया 2023 की फाइनलिस्ट रह चुकी थीं. उनकी दो बेटियां थीं, जिनकी उम्र अभी सपने देखने की थी. साथ में कुछ अन्य रिश्तेदार भी होटल में ठहरे हुए थे. उन सबका एक ही मकसद था. राधे श्याम अग्रवाल के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताना.
लेकिन 3 जून की सुबह फ्लोरिश स्टे होटल में भीषण आग लग गई. कुछ ही मिनटों में आग ने पूरे होटल को अपनी चपेट में ले लिया. लोग बाहर निकलने की कोशिश करते रहे, चीखते रहे, मदद मांगते रहे, लेकिन कई जिंदगियां धुएं और लपटों के बीच कैद हो गईं. जब आग बुझी, तब तक अग्रवाल परिवार के आठ सदस्य हमेशा के लिए जा चुके थे.
मेरे परिवार के लोग मेरे से मिलने क्यों नहीं आते अब
विडंबना देखिए, जिस बुजुर्ग पिता की सेवा के लिए पूरा परिवार दिल्ली आया था, वही अस्पताल के आईसीयू में जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे थे. उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि जिस परिवार का इंतजार वह रोज करते हैं, वह अब इस दुनिया में नहीं है. अस्पताल के कर्मचारियों के अनुसार राधे श्याम अग्रवाल बार-बार पूछते थे कि परिवार के लोग मिलने क्यों नहीं आ रहे. कोई साफ जवाब नहीं देता था.
इस कहानी का सबसे दर्दनाक हिस्सा शायद उनकी पोती से जुड़ा है.
बेंगलुरु में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही उनकी बड़ी पोती विशेष रूप से अपने दादा से मिलने दिल्ली आई थी. रिश्तेदार बताते हैं कि पोती को देखकर राधे श्याम अग्रवाल बेहद खुश थे. उन्होंने अस्पताल की नर्सों से गर्व से कहा था कि उनकी पोती इतनी दूर सिर्फ उन्हें देखने आई है. उन्हें क्या पता था कि यह मुलाकात आखिरी साबित होगी. जिस दिन परिवार को दादा से विदाई लेने आना था, उसी दिन किस्मत ने पूरा नजारा ही बदल दिया. दादा को विदा करने आए लोग खुद हमेशा के लिए इन दुनिया से विदा हो गए.
हादसे के बाद भी राधे श्याम अग्रवाल अस्पताल में भर्ती रहे. उन्हें परिवार की मौत की खबर नहीं दी गई. लेकिन शायद जिंदगी ने उनके लिए भी ज्यादा समय नहीं बचाया था. अब राधे श्याम अग्रवाल ने भी अंतिम सांस ले ली है. उनकी मौत के साथ ही अग्रवाल परिवार की आखिरी कड़ी भी टूट गई.
एक सप्ताह में नौ मौतें. एक परिवार, जिसकी तीन पीढ़ियां थीं, अब इतिहास बन चुका है.
आज गुरुग्राम के सेक्टर-46 स्थित उस घर में न बच्चों की आवाज गूंजती है, न किसी के आने-जाने की आहट सुनाई देती है. जिन कमरों में कभी परिवार साथ बैठकर खाना खाता होगा, जहां त्योहार मनाए जाते होंगे, जहां भविष्य की योजनाएं बनती होंगी, वहां अब सिर्फ सन्नाटा है. कुछ हादसे सिर्फ जान नहीं लेते, वे पूरे वंश की कहानी खत्म कर देते हैं.
मालवीय नगर का यह अग्निकांड भी ऐसी ही एक कहानी बन गया है- एक ऐसी कहानी, जिसमें एक परिवार अपने बुजुर्ग को बचाने आया था, लेकिन अंत में पूरा परिवार ही दुनिया से चला गया. अब पीछे बची हैं तो सिर्फ यादें, कुछ तस्वीरें और उन रिश्तेदारों का दर्द, जो शायद जिंदगी भर इस खालीपन को महसूस करेंगे.
अग्रवाल परिवार में कौन-कौन था?
1 – CA विवेक अग्रवाल
2– पत्नी तर्जनी अग्रवाल, इवेंट मैनेजर
3– बेटी जीविशा अग्रवाल
4– बेटी वारिया अग्रवाल
5– मां प्रेमलता अग्रवाल
6– मौसा जवरीलाल
7– मौसी कमला
8– मामा अशोक पंसारी
9. मुखिया- राधे श्याम अग्रवाल




