0 सीट के बाद भी Prashant Kishor ने नहीं मानी हार, अब उपचुनाव में BJP के गढ़ में ठोकी ताल; RJD और कांग्रेस पर कसा तंज
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में खाता नहीं खोल पाने के बावजूद Prashant Kishor अब बांकीपुर सीट से बड़ा राजनीतिक दांव खेलने की तैयारी में हैं. BJP के Nitin Nabin के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई सीट पर जन सुराज पार्टी उपचुनाव लड़ने जा रही है. किशोर ने इसे NDA सरकार के पहले साल पर 'जनता का जनमत संग्रह' बताया है.
Prashant Kishor Eyes BJP Bastion Bankipur After Bihar Poll Setback: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में खाता तक नहीं खोल पाने वाले चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर अब सीधे BJP के गढ़ पर हमला बोलने की तैयारी में हैं. जन सुराज पार्टी ने पटना की चर्चित बांकीपुर सीट पर होने वाले उपचुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. यह वही सीट है जिसे बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने राज्यसभा जाने के बाद खाली किया है.
हालांकि, बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई थी, लेकिन करीब 3.4% वोट शेयर हासिल कर पार्टी ने अपनी मौजूदगी जरूर दर्ज कराई थी. अब प्रशांत किशोर इसे सिर्फ एक उपचुनाव नहीं, बल्कि NDA सरकार के खिलाफ 'जनमत संग्रह' बनाने की कोशिश कर रहे हैं. पटना में पत्रकारों से बातचीत में किशोर ने कहा कि जब तक बांकीपुर उपचुनाव होगा, तब तक NDA सरकार को सत्ता में आए 7-8 महीने हो चुके होंगे. ऐसे में यह चुनाव जनता के मूड का बड़ा संकेत देगा.
बांकीपुर सीट क्यों है बीजेपी का गढ़?
बांकीपुर सीट लंबे समय से BJP का मजबूत किला मानी जाती है. नितिन नवीन ने यहां लगातार पांचवीं बार जीत दर्ज की थी और RJD उम्मीदवार को 50 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था. दिलचस्प बात यह रही कि जन सुराज उम्मीदवार तीसरे नंबर पर रहा था.
'BJP को जन सुराज पार्टी ही चुनौती दे सकती है'
अब प्रशांत किशोर दावा कर रहे हैं कि BJP को अगर कोई चुनौती दे सकता है तो वह सिर्फ जन सुराज पार्टी है. उन्होंने RJD और कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि ये दल सालों से भारी अंतर से हारते आए हैं, जबकि उनकी पार्टी को सिर्फ एक मजबूत उम्मीदवार उतारने की जरूरत है. हालांकि जब उनसे पूछा गया कि क्या वह खुद बांकीपुर से चुनाव लड़ेंगे, तो उन्होंने सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा कि यह फैसला पार्टी सामूहिक रूप से करेगी.
क्या प्रशांत किशोर और उदय सिंह के बीच सबकुछ ठीक है?
प्रशांत किशोर ने उन चर्चाओं को भी खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि उनकी और पार्टी अध्यक्ष उदय सिंह के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा. उन्होंने कहा कि उदय सिंह उनके भाई जैसे हैं और उनका राजनीति से एक साल का ब्रेक लेने का फैसला सम्मानजनक है. किशोर ने यह भी बताया कि चुनावी हार के बाद उन्होंने आत्ममंथन किया और गांधी आश्रम से प्रेरित होकर पटना के बाहर अपना आश्रम बनाने का फैसला लिया.
पीके ने इस दौरान बिहार सरकार पर भी हमला बोला और शिक्षक भर्ती परीक्षा की मांग कर रहे अभ्यर्थियों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर Samrat Choudhary की सरकार को घेरा. अब सवाल यही है कि क्या प्रशांत किशोर का 'जन सुराज मॉडल' बांकीपुर में BJP के किले में सेंध लगा पाएगा, या फिर यह चुनाव भी बिहार की पारंपरिक राजनीति के आगे फीका पड़ जाएगा.




