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अमेरिका से चीन और फिर कश्मीर के आतंकियों तक! GoPro कैमरे ने खोले पहलगाम अटैक के बड़े राज, NIA की जांच में क्या-क्या पता चला?

पहलगाम आतंकी हमले की जांच में NIA को बड़ा सुराग मिला है. आतंकियों के पास से मिला GoPro कैमरा अमेरिका में बना था और चीन भेजा गया था. अब एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि यह कैमरा आखिर लश्कर आतंकियों तक कैसे पहुंचा.

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NIA की जांच में बड़ा खुलासा, लश्कर आतंकियों के पास मिला चीन लिंक वाला कैमरा 

( Image Source:  ANI )

Pahalgam terror attack investigation: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच अब पहलगाम आतंकी हमले के एक बेहद अहम सुराग पर टिक गई है. एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि अमेरिका में बना एक हाई-टेक GoPro कैमरा, जिसे आधिकारिक तौर पर चीन भेजा गया था, आखिर जम्मू-कश्मीर में सक्रिय Lashkar-e-Taiba आतंकियों तक कैसे पहुंचा. यह कैमरा उन तीन आतंकियों के पास से बरामद हुआ था, जिन्हें पिछले साल जुलाई में डाचीगाम के जंगलों में भारतीय सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में मार गिराया था.


जांच एजेंसियों का मानना है कि यह सिर्फ एक कैमरा नहीं, बल्कि आतंकियों के अंतरराष्ट्रीय सप्लाई नेटवर्क का बड़ा सुराग बन सकता है. अधिकारियों के मुताबिक, इस कैमरे की सप्लाई चेन का पता लगाना इसलिए भी अहम है, क्योंकि इससे उन गुप्त नेटवर्क्स की जानकारी मिल सकती है, जो आतंकियों तक हथियार, फंडिंग, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और टैक्टिकल गियर पहुंचाते हैं.



चीन के डिस्ट्रीब्यूटर को सप्लाई किया गया कैमरा

सूत्रों के अनुसार, NIA ने GoPro कंपनी से औपचारिक संपर्क कर कैमरे की खरीद और सप्लाई हिस्ट्री मांगी थी. जवाब में कंपनी ने बताया कि यह कैमरा चीन में मौजूद एक अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटर को सप्लाई किया गया था. अब जांच एजेंसियां इस एंगल पर भी काम कर रही हैं कि कहीं यह उपकरण पाकिस्तानी सेना या उससे जुड़े नेटवर्क्स के जरिए आतंकियों तक तो नहीं पहुंचाया गया.


भारत और चीन के बीच Mutual Legal Assistance Treaty (MLAT) नहीं होने की वजह से जांच एजेंसियों को इस मामले में सीधे कानूनी सहयोग नहीं मिल सकता. ऐसे मामलों में केवल राजनयिक चैनलों के जरिए ही जानकारी जुटाई जा सकती है.

कब हुआ पहलगाम आतंकी हमला?

यह पूरा मामला 22 अप्रैल 2025 को हुए Pahalgam Terror Attack से जुड़ा है, जिसमें पहलगाम के बैसरन इलाके में आतंकियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी. इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे. हमले के बाद भारत ने 6 और 7 मई की रात Operation Sindoor लॉन्च किया था. इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों और Jaish-e-Mohammed जैसे संगठनों के कैंपों को निशाना बनाया गया. इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव काफी बढ़ गया था, जो 10 मई को युद्धविराम की अपील के बाद शांत हुआ.


किन आतंकियों को डाचीगाम मुठभेड़ में मारा गया?

जिन तीन आतंकियों को डाचीगाम मुठभेड़ में मारा गया, उनकी पहचान फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी के रूप में हुई थी. जांच में यह भी सामने आया कि हमले में इस्तेमाल कम से कम दो AK-47 राइफलें और एक अन्य हथियार चीनी मूल के थे. NIA अब तक इस मामले में लश्कर-ए-तैयबा और छह लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. हालांकि, एजेंसी का कहना है कि आतंकियों के अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक नेटवर्क की जांच अभी भी जारी है.

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