मरणोपरांत बेटे का मिला सम्मान तो मां नहीं रख पाई खुद पर काबू, खूब बहे आंसू, राष्ट्रपति से गले लग भी रोईं
रक्षा अलंकरण समारोह 2026 में शहीद सिपाही जंजल प्रवीण प्रभाकर को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया. पुरस्कार ग्रहण करते समय उनकी मां भावुक हो गईं, जिस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें गले लगाकर सांत्वना दी.
सोमवार की एक शांत और गरिमामयी सुबह थी. जब राष्ट्रपति भवन का दरबार हॉल देश के सबसे बड़े जांबाजों के सम्मान में सजा हुआ था. इस दौरान एक नाम पुकारा गया 'सिपाही जंजल प्रवीण प्रभाकर (मरणोपरांत)'. जैसे ही यह नाम गूंजा, हॉल में सन्नाटा छा गया. एक मां अपने कदमों को संभालते हुए मंच की तरफ बढ़ी. यह कदम सिर्फ मंच की तरफ नहीं थे, बल्कि अपने उस कलेजे के टुकड़े की यादों की तरफ थे, जिसने देश की रक्षा के लिए हंसते-हंसते अपनी जान न्योछावर कर दी थी.
मां जैसे ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सामने पहुंची, देश का दूसरा सबसे बड़ा शांतिकालीन वीरता पुरस्कार 'कीर्ति चक्र' हाथ में लेते ही उनके सब्र का बांध टूट गया. वह मंच पर ही फूट-फूटकर रोने लगीं. तभी वहां कुछ ऐसा हुआ, जिसने प्रोटोकॉल की हर दीवार को गिरा दिया. देश की सर्वोच्च कमांडर और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपनी जगह से आगे बढ़ीं. उन्होंने उस वीर मां के कांपते हाथों को थामा, उन्हें गले से लगाया और बेहद भावुक होकर ढांढस बंधाया. यह सिर्फ दो महिलाओं का मिलन नहीं था, बल्कि पूरा देश एक शहीद की मां के आंसुओं को पोंछ रहा था. इस भावुक पल ने वहां मौजूद सेना के कड़े मिजाज वाले बड़े अधिकारियों, मंत्रियों और हर एक शख्स की आंखों को नम कर दिया.
कैसे देश पर कुर्बान हो गए प्रवीण प्रभाकर
6 जुलाई, 2024 और जगह थी जम्मू-कश्मीर का कुलगाम इलाका आतंकी हमले के दौरान जंजल प्रवीण प्रभाकर वीरगति को प्राप्त हुए. देश की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले प्रवीण ने डटकर आतंकियों का सामना किया. दरअसल पहाड़ों और घाटियों के बीच बसे इस इलाके में अचानक हलचल तेज हो गई थी. जब भारतीय सेना को खुफिया इनपुट मिला था कि कुछ बेहद खतरनाक और कट्टर आतंकवादी एक रिहायशी इलाके में छिपे हुए हैं. इतना ही नहीं, खबर यह भी थी कि आतंकियों ने कुछ मासूम स्थानीय नागरिकों को बंधक बना लिया है. सिपाही जंजल प्रवीण प्रभाकर महार रेजिमेंट के जांबाज सिपाही थे और उस वक्त राष्ट्रीय राइफल्स (RR) की प्रथम बटालियन में अपनी सेवाएं दे रहे थे. जैसे ही इस ऑपरेशन की जिम्मेदारी उनकी यूनिट को मिली, सिपाही प्रभाकर बिना एक पल गंवाए आगे बढ़े. आमने-सामने की इस भीषण मुठभेड़ में उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए एक बेहद कट्टर आतंकवादी को मार गिराया.
देश के इन नायकों को सलाम
राष्ट्रपति भवन का यह रक्षा अलंकरण समारोह 2026 उन सभी नायकों के नाम रहा, जिन्होंने देश की संप्रभुता के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया. इस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के अलग-अलग हिस्सों में अपनी वीरता का लोहा मनवाने वाले सैनिकों को सम्मानित किया.
समारोह में कुल मिलाकर:
07 कीर्ति चक्र प्रदान किए गए (जिनमें से दो मरणोपरांत थे)
15 वीर चक्र से जांबाज सैनिकों को नवाजा गया
29 शौर्य चक्र देश के वीर सपूतों की छाती पर सजाए
यह आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं हैं, बल्कि यह देश के उस सुरक्षित माहौल की कीमत है, जो हमारे सैनिक अपनी रातों की नींद और अपने खून से चुकाते हैं.
अंतरिक्ष यात्री प्रशांत नायर और लेफ्टिनेंट शशांक भी हुए सम्मानित
इस समारोह में केवल घाटी के शूरवीर ही नहीं, बल्कि देश का नाम दुनिया और अंतरिक्ष में रोशन करने वाले नायक भी मौजूद थे. सम्मानित होने वाले विजेताओं में भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर भी शामिल थे. आपको बता दें कि ग्रुप कैप्टन नायर भारत के बेहद महत्वाकांक्षी 'गगनयान मिशन' के लिए चुने गए चार अंतरिक्ष यात्रियों में से एक हैं. इसके साथ ही, सिक्किम स्काउट्स के लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी को भी इस समारोह में मरणोपरांत सम्मानित किया गया. लेफ्टिनेंट शशांक ने बेहद विषम परिस्थितियों और उच्च ऊंचाई वाले (High Altitude) अभियानों के दौरान अदम्य साहस का परिचय दिया था. उनकी मां और परिवार के सदस्यों ने जब यह पुरस्कार हासिल किया.




