फाल्टा में TMC की ऐतिहासिक हार के बाद पार्टी में बगावत! सांसद Kakoli Dastidar ने दिया इस्तीफा, IPAC पर लगाए गंभीर आरोप
पश्चिम बंगाल में फाल्टा सीट पर TMC की करारी हार के बाद पार्टी के अंदर बगावत के सुर तेज हो गए हैं. Kakoli Ghosh Dastidar ने बारासात जिला संसदीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का ऐलान करते हुए चुनावी हार के लिए IPAC पर दबाव बनाने और गलत तरीके से काम कराने का आरोप लगाया है.
TMC MP Kakoli Dastidar
पश्चिम बंगाल की राजनीति में फाल्टा विधानसभा सीट के नतीजों ने बड़ा राजनीतिक भूचाल ला दिया है. ममता बनर्जी की पार्टी TMC को न सिर्फ करारी हार का सामना करना पड़ा, बल्कि अब पार्टी के अंदर से भी बगावत की आवाजें उठने लगी हैं. बारासात से TMC सांसद Kakoli Ghosh Dastidar ने जिला संसदीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का ऐलान करते हुए चुनावी हार के लिए सीधे तौर पर IPAC को जिम्मेदार ठहरा दिया.
काकोली दस्तीदार ने बेहद नाराजगी भरे अंदाज में कहा कि चुनाव के दौरान 'छोटे-छोटे बच्चे' उन पर दबाव बना रहे थे. इसी वजह से पार्टी का पूरा वर्क प्रोसेस बिगड़ गया. उन्होंने कहा कि जिस तरीके से IPAC टीम ने काम में दखल दिया, वह राजनीति चलाने का सही तरीका नहीं था.
TMC सांसद ने क्या कहा?
TMC सांसद ने साफ कहा, “मेरे इलाके की सभी सीटों पर हम हार गए हैं. इसलिए मैं इस्तीफा दे रही हूं.” यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब फाल्टा सीट पर BJP उम्मीदवार Debangshu Panda ने एक लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, पांडा को करीब 1.49 लाख वोट मिले.
TMC उम्मीदवार जहांगीर खान चौथे स्थान पर
सबसे बड़ा झटका TMC के लिए यह रहा कि जिस 'डायमंड हार्बर मॉडल' को पार्टी लंबे समय से अपनी ताकत बताती रही, उसी इलाके में पार्टी का पूरी तरह सफाया हो गया. TMC उम्मीदवार जहांगीर खान चौथे स्थान पर खिसक गए और पार्टी अपनी जमानत तक नहीं बचा पाई.
ममता बनर्जी ने EVM से छेड़छाड़ का लगाया आरोप
इधर, अभिषेक बनर्जी लगातार चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं. वहीं, ममता बनर्जी ने भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि काउंटिंग के दौरान EVM से छेड़छाड़ हुई, वोट लूटे गए और उन्हें काउंटिंग सेंटर से बाहर कर दिया गया. ममता ने दावा किया कि 4 मई के नतीजों के बाद से बंगाल में TMC कार्यकर्ताओं को डर और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है.
अब फाल्टा की हार सिर्फ एक चुनावी हार नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे TMC के संगठन, रणनीति और अंदरूनी असंतोष पर बड़ा सवाल माना जा रहा है. दूसरी तरफ BJP इसे बंगाल की राजनीति में 'बदलाव की शुरुआत' बताकर बड़ा नैरेटिव बनाने में जुट गई है.




