Begin typing your search...

ईरान में फंसे भारतीयों से लेकर गैस-तेल तक, मिडिल ईस्ट पर भारत की कूटनीति तेज, सरकार ने दिया हर जवाब, PAK को भी दो टूक

Iran Crisis : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने कूटनीतिक संपर्क तेज कर दिए हैं. जयशंकर ने ईरान से तीन बार बातचीत की, वहीं भारत ने पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करते हुए आतंकवाद पर उसकी साख पर सवाल उठाए.

Iran Israel War India diplomacy Jaishankar
X
( Image Source:  ANI )

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर ने हाल के दिनों में अपने ईरानी समकक्ष से तीन बार बातचीत की है. वहीं पाकिस्तान के आरोपों को भारत ने सिरे से खारिज करते हुए कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर उसकी कोई विश्वसनीयता नहीं है. ईरान-इजरायल तनाव के बीच विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जा रही है. सरकार स्थानीय प्रशासन और दूतावास के जरिए संपर्क में है. साथ ही जरूरत पड़ने पर भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी और सहायता के लिए सभी जरूरी विकल्प तैयार रखे गए हैं.

साथ ही सरकार पश्चिम एशिया संकट के बीच ऊर्जा सुरक्षा, शिपिंग सेफ्टी और खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा पर भी लगातार नजर बनाए हुए है. समझे 10 प्वाइंट में डिटेल.

1. ईरान-इजरायल युद्ध के बीच भारत की कूटनीति कितनी सक्रिय?

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत लगातार कूटनीतिक संपर्क बनाए हुए है. हाल के दिनों में भारत के विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष से तीन बार बातचीत की है. इन वार्ताओं में क्षेत्रीय हालात, वैश्विक असर और शांति बहाली के उपायों पर चर्चा हुई है.

2. क्या प्रधानमंत्री ने खाड़ी देशों के नेताओं से भी बात की है?

MEA के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खाड़ी क्षेत्र के कई नेताओं से बातचीत की है. इन चर्चाओं में उन्होंने संघर्ष को जल्द खत्म करने के लिए संवाद और कूटनीति पर जोर दिया. साथ ही आम नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्र में रह रहे भारतीयों की भलाई को भी सबसे अहम बताया गया.

3. पाकिस्तान के आरोपों पर भारत ने क्या जवाब दिया?

पाकिस्तान के आरोपों पर भारत ने सख्त प्रतिक्रिया दी है. रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान के लिए अपनी गलतियों का दोष भारत पर डालना पुरानी आदत बन चुकी है. उन्होंने कहा कि दशकों से आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश के तौर पर सीमा पार आतंकवाद के मामले में पाकिस्तान की विश्वसनीयता लगभग खत्म हो चुकी है.

4. भारत ने पाकिस्तान को ‘आतंकवाद पर साख नहीं’ क्यों कहा?

MEA प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को प्रायोजित करने के आरोपों से घिरा रहा है. ऐसे में जब वह भारत पर आरोप लगाता है तो उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं. भारत का कहना है कि कहानी गढ़ने या खुद को पीड़ित दिखाने से वास्तविकता नहीं बदलती और दुनिया अब इन दावों को गंभीरता से नहीं लेती.

5. ईरान के साथ बातचीत में किन मुद्दों पर चर्चा हुई?

विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar और ईरान के विदेश मंत्री के बीच हुई बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ शिपिंग की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा जरूरतों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई. पश्चिम एशिया में तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री मार्गों की सुरक्षा भारत के लिए अहम चिंता का विषय बन गई है.

6. क्या पश्चिम एशिया के तनाव का असर वैश्विक जीवन पर भी पड़ रहा है?

MEA के मुताबिक, ईरान-इजरायल संघर्ष का असर केवल क्षेत्रीय स्तर तक सीमित नहीं है. इसका प्रभाव दुनिया के कई देशों और आम लोगों की जिंदगी पर भी पड़ रहा है. ऊर्जा आपूर्ति, व्यापारिक मार्गों और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ने वाले असर को देखते हुए भारत स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है.

7. क्या भारत से पड़ोसी देशों ने ईंधन की मांग की है?

रणधीर जायसवाल ने बताया कि बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव ने भारत से पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई बढ़ाने का अनुरोध किया है. पश्चिम एशिया के तनाव के कारण वैश्विक फ्यूल सप्लाई प्रभावित होने लगी है, जिससे कई देशों में पेट्रोल और डीज़ल की कमी की आशंका पैदा हो गई है.

8. बांग्लादेश को भारत किस तरह डीज़ल सप्लाई कर रहा है?

भारत बांग्लादेश को जलमार्ग, रेल और इंडिया बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन के जरिए डीजल सप्लाई कर रहा है. यह दोनों देशों के बीच चल रहे ऊर्जा सहयोग का हिस्सा है. भारत की नुमालीगढ़ रिफाइनरी से बांग्लादेश को नियमित रूप से पेट्रोलियम उत्पाद भेजे जाते रहे हैं.

9. क्या भारत अपनी जरूरतों को ध्यान में रखकर ही ईंधन निर्यात करेगा?

MEA प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि भारत पड़ोसी देशों की मदद करेगा, लेकिन इसके साथ ही अपनी घरेलू जरूरतों को भी प्राथमिकता देगा. डीज़ल की उपलब्धता, रिफाइनिंग क्षमता और घरेलू मांग को ध्यान में रखकर ही अतिरिक्त सप्लाई का फैसला लिया जाएगा.

10. क्या भारत क्षेत्रीय ऊर्जा सहयोग में बड़ी भूमिका निभा रहा है?

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत दक्षिण एशिया में ऊर्जा सहयोग का महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है. भारत से बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव को ईंधन सप्लाई क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग को मजबूत करती है. इससे संकट के समय पड़ोसी देशों को राहत मिलती है और भारत की रणनीतिक भूमिका भी मजबूत होती है.

India NewsIndia
अगला लेख