क्या करके मानेंगे CM शुभेंदु अधिकारी? 15 दिन में लिए 20 बड़े फैसले, क्या है मास्टरप्लान?
CM Suvendu Adhikari ने 15 दिन में 20 बड़े फैसले लेकर बंगाल की राजनीति गरमा दी. उन पर मुस्लिम विरोध का ठप्पा भी लगा है. जानिए क्या है उनका बड़ा सियासी मास्टरप्लान.
बंगाल की राजनीति में इन दिनों शुभेंदु अधिकारी सबसे चर्चित चेहरों में शामिल हैं. आक्रामक हिंदुत्व, अल्पसंख्यक विरोध, सीमा सुरक्षा, भ्रष्टाचार विरोधी अभियान और सख्त प्रशासनिक फैसलों के कारण उनकी तुलना बहुत कम समय में योगी आदित्यनाथ और हिमंता बिस्वा सरमा जैसे नेताओं से होने लगी है. बंगाल की राजनीति में उनकी सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है. कम समय में वहां की राजनीति पर उनक मजबूत पकड़ ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का बड़ा केंद्र बना दिया है. जानें उन्होंने
क्या बीजेपी का नया आक्रामक चेहरा हैं शुभेंदु?
सियासी जानकारों का कहना है कि शुभेंदु अधिकारी खुद को सिर्फ बंगाल तक सीमित नेता नहीं रखना चाहते. कथित घुसपैठ, सीमा सुरक्षा, हिंदुत्व और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर जिस तरह उन्होंने लगातार आक्रामक रुख अपनाया है, उससे भाजपा के कोर वोटर के बीच उनकी स्वीकार्यता बढ़ी है. यही वजह है कि बंगाल भाजपा के भीतर उनका कद लगातार मजबूत होता दिखाई दे रहा है.
विशेषज्ञ मानते हैं कि भाजपा नेतृत्व बंगाल में ऐसे चेहरे की तलाश में है जो एक साथ आक्रामक राजनीति, संगठन और प्रशासनिक छवि को संभाल सके. शुभेंदु अधिकारी इस फॉर्मूले में फिट बैठते दिखाई देते हैं. नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराने के बाद उनका राजनीतिक कद राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से बढ़ा.
मोदी, शाह और RSS नेतृत्व के करीब?
सियासी गलियारों में यह चर्चा लगातार होती रही है कि शुभेंदु अधिकारी की नजदीकी पीएम नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नेतृत्व से बढ़ी है. बंगाल में भाजपा को मजबूत करने की रणनीति में उनकी भूमिका को काफी अहम माना जाता है. खासतौर पर ‘चिकन नेक’ क्षेत्र की सुरक्षा, सीमावर्ती इलाकों में संगठन विस्तार और केंद्रीय योजनाओं के प्रचार में उनकी सक्रियता ने उन्हें पार्टी के भीतर मजबूत बनाया है.
राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जाता है कि अगर बंगाल में भाजपा भविष्य में सत्ता के करीब पहुंचती है तो शुभेंदु अधिकारी पार्टी के सबसे बड़े दावेदारों में हो सकते हैं. भाजपा के युवा नेताओं और केंद्रीय पर्यवेक्षकों के साथ उनका तालमेल भी संगठन में उनकी स्थिति मजबूत कर रहा है.
कानून-व्यवस्था पर आक्रामक लाइन
शुभेंदु अधिकारी की राजनीति का सबसे बड़ा आधार उनका आक्रामक हिंदुत्व और कानून-व्यवस्था पर सख्त रुख माना जा रहा है. मुस्लिम तुष्टिकरण, कथित बांग्लादेशी घुसपैठ और धार्मिक आधार पर सरकारी योजनाओं को लेकर उनके बयान लगातार सुर्खियों में रहे हैं. समर्थक इसे “तुष्टिकरण खत्म करने” की राजनीति बताते हैं, जबकि विपक्ष इसे ध्रुवीकरण की रणनीति करार देता है.
उन्होंने कई मौकों पर अवैध प्रवासियों के खिलाफ “Detect, Delete, Deport” जैसी लाइन का समर्थन किया. रेलवे स्टेशनों और सीमावर्ती इलाकों में कथित घुसपैठ रोकने के लिए निगरानी बढ़ाने की मांग भी चर्चा में रही. सार्वजनिक स्थानों पर नमाज और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर भी उनका रुख काफी सख्त दिखाई दिया.
भ्रष्टाचार विरोधी राजनीति से बढ़ा कद
भ्रष्टाचार विरोधी मुद्दों पर भी शुभेंदु अधिकारी लगातार आक्रामक रहे हैं. शिक्षक भर्ती घोटाला, नगरपालिका भर्ती घोटाला और कथित “कैश फॉर जॉब” नेटवर्क जैसे मामलों में उन्होंने लगातार जांच और कार्रवाई की मांग उठाई. यही वजह है कि भाजपा समर्थक उन्हें बंगाल में “भ्रष्टाचार विरोधी चेहरा” के तौर पर पेश करते हैं.
संदेशखाली मामले में शेख शाहजहां के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर भी उन्होंने लगातार आंदोलनात्मक रुख अपनाया. राजनीतिक हिंसा, महिला सुरक्षा और कथित प्रशासनिक भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर उनका आक्रामक अभियान भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक हथियार बना.
क्या योगी और हिमंता को चुनौती दे सकते हैं?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक शुभेंदु अधिकारी की शैली कई मामलों में योगी आदित्यनाथ और हिमंता बिस्वा सरमा की राजनीति से मेल खाती है. आक्रामक बयान, हिंदुत्व आधारित राजनीति और कानून-व्यवस्था को केंद्रीय मुद्दा बनाना उनकी रणनीति का अहम हिस्सा है. हालांकि योगी और हिमंता दोनों मुख्यमंत्री के रूप में प्रशासनिक अनुभव रखते हैं, जबकि शुभेंदु अधिकारी अभी विपक्ष की राजनीति में हैं.
फिर भी भाजपा के अंदर उन्हें भविष्य के बड़े हिंदुत्ववादी चेहरे के रूप में देखा जा रहा है. यदि बंगाल में भाजपा का जनाधार और मजबूत होता है, तो राष्ट्रीय राजनीति में उनका प्रभाव और बढ़ सकता है.
शुभेंदु सरकार के चर्चित फैसले और दावे
- Ayushman Bharat लागू करने का समर्थन और केंद्रीय स्वास्थ्य योजनाओं को तेज करने की बात.
- पश्चिम बंगाल सरकार ने 1990 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल को राज्य का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है. इस नियुक्ति से पहले वह राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पद पर तैनात थे, जिन्होंने हालिया विधानसभा चुनावों की देखरेख की थी.
- भारत-बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग और BSF को जमीन हस्तांतरण की मांग.
- 7वें वेतन आयोग लागू करने का समर्थन.
- महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा और आर्थिक सहायता योजनाओं का समर्थन.
- OBC आरक्षण में बदलाव और कथित तुष्टिकरण खत्म करने की बात.
- इमाम और मुअज्जिन भत्ते जैसी योजनाओं का विरोध.
- रेलवे स्टेशनों पर कथित घुसपैठियों की निगरानी बढ़ाने की मांग.
- “Detect, Delete, Deport” नीति का समर्थन.
- सार्वजनिक स्थानों पर नमाज को लेकर सख्त प्रशासनिक नियंत्रण की मांग.
- नए मेडिकल कॉलेज खोलने और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की बात.
- भर्ती परीक्षाओं में OMR शीट की कार्बन कॉपी देने और पारदर्शिता बढ़ाने की मांग.
- शिक्षक भर्ती घोटाले में Partha Chatterjee समेत आरोपियों के खिलाफ CBI कार्रवाई की मांग.
- नगरपालिका और कोऑपरेटिव भर्ती घोटालों की जांच की मांग.
- “कैश फॉर जॉब” नेटवर्क की जांच के लिए विशेष पैनल बनाने का समर्थन.
- भ्रष्टाचार के मामलों में अभियोजन स्वीकृति देकर कार्रवाई तेज करने की बात.
- संदेशखाली मामले में विशेष जांच और कार्रवाई की मांग.
- राजनीतिक हिंसा के मामलों में SIT/CBI जांच की मांग.
- राजनीतिक हिंसा प्रभावित परिवारों को सहायता और सुरक्षा देने की बात.
- भ्रष्टाचार के खिलाफ “Zero Tolerance” नीति का समर्थन.
विपक्ष क्यों लगा रहा ध्रुवीकरण का आरोप?
विपक्षी दलों का आरोप है कि शुभेंदु अधिकारी की राजनीति सामाजिक ध्रुवीकरण पर आधारित है. कांग्रेस और All India Trinamool Congress लगातार उन पर धार्मिक आधार पर राजनीति करने का आरोप लगाते रहे हैं. हालांकि भाजपा समर्थक मानते हैं कि बंगाल में कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों को उन्होंने राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बना दिया है. इसी वजह से शुभेंदु अधिकारी अब सिर्फ बंगाल के नेता नहीं बल्कि भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में तेजी से उभरते चेहरे के रूप में देखे जा रहे हैं.
मुस्लिम विरोधी छवि क्यों?
Suvendu Adhikari पर हाल के समय में मुस्लिम विरोधी होने के आरोप इसलिए लग रहे हैं क्योंकि उन्होंने कथित घुसपैठ, धार्मिक तुष्टिकरण और सरकारी योजनाओं में धर्म आधारित लाभ को लेकर लगातार आक्रामक बयान दिए हैं. इमाम-मुअज्जिन भत्ते का विरोध, OBC आरक्षण में बदलाव की मांग, सार्वजनिक स्थानों पर नमाज को लेकर सख्त रुख और “Detect, Delete, Deport” जैसे बयानों को विपक्ष मुस्लिम विरोधी राजनीति से जोड़ता है.
सीमावर्ती इलाकों में कथित बांग्लादेशी घुसपैठ रोकने, रेलवे स्टेशनों पर निगरानी बढ़ाने और फर्जी दस्तावेज नेटवर्क पर कार्रवाई की मांग ने भी विवाद बढ़ाया. संदेशखाली और राजनीतिक हिंसा जैसे मुद्दों पर उनकी आक्रामक राजनीति को भाजपा समर्थक कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जोड़ते हैं, जबकि विपक्षी दल इसे ध्रुवीकरण की रणनीति बताते हैं. यही वजह है कि उनकी छवि एक आक्रामक हिंदुत्ववादी नेता के रूप में तेजी से उभरी है.
बंगाल विधानसभा चुनाव का 4 मई को परिणाम आने केबाद शुभेंदु अधिकारी ने 9 मई 2026 को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित इस ऐतिहासिक समारोह में उन्हें राज्यपाल आर. एन. रवि ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.




